
नर्मदापुरम / धर्म माघ मास की गुप्त नवरात्रि के पावन अवसर पर आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रवाह चरम पर है। पंडित यश उपाध्याय के अनुसार, गुप्त नवरात्रि का दूसरा दिन आद्या शक्ति माँ तारा को समर्पित होता है। यह समय सामान्य पूजा-पाठ से इतर, स्वयं के भीतर छिपी शक्तियों को जागृत करने और कठिन साधना के माध्यम से जीवन में आमूलचूल परिवर्तन लाने का है।
*दुखों से तारने वाली हैं ‘तारिणी’*
माँ तारा को ‘तारिणी’ के नाम से भी जाना जाता है, जिसका अर्थ है वह देवी जो अपने भक्तों को संसार के दुखों, बाधाओं और घोर संकटों के सागर से सुरक्षित बाहर निकालती हैं। उनकी पूजा केवल बाहरी प्रदर्शन नहीं, बल्कि एक आंतरिक यात्रा है।
*मंत्र और साधना का प्रभाव*
साधकों के लिए इस दिन (“ॐ ह्नीं स्त्रीं हुम फट)” मंत्र का जाप विशेष फलदायी माना गया है। पंडित जी बताते हैं कि:
* यह मंत्र नकारात्मकता का नाश कर मानसिक स्थिरता प्रदान करता है।
* इससे साधक को दिव्य ज्ञान की प्राप्ति होती है।
* जीवन के हर क्षेत्र में सफलता के द्वार खुलते हैं और नई शुरुआत का मार्ग प्रशस्त होता है।
*सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संगम*
माँ तारा की महत्ता केवल हिंदू सनातन परंपरा तक सीमित नहीं है, बल्कि बौद्ध धर्म में भी इन्हें विशेष स्थान प्राप्त है। मान्यता है कि स्वयं भगवान बुद्ध ने भी माँ तारा की साधना की थी, जो उनकी सर्वव्यापकता और करुणा को दर्शाता है।
“गुप्त नवरात्रि की यह साधना साधक को आडंबरों से दूर कर आत्मिक शांति और विजय की ओर ले जाती है।”

