
विदिशा / प्रतिवर्ष अनुसार इस वर्ष भी वसंत पंचमी को स्वर्णकार दिवस के रूप में मनाए जाने का आग्रह अखिल भारतीय स्वर्णकार महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष लायन राजकुमार सर्राफ प्रिंस द्वारा सर्व स्वर्णकार स्वजाति बंधुओ से किया है। राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अखिल भारतीय स्वर्णकार महासभा एवं मध्य प्रदेश स्वर्णकार समाज कल्याण समिति जिला विदिशा जिला अध्यक्ष लायन अरुण कुमार सोनी ने बताया कि 23 जनवरी 2026 बंसत पंचमी, मां सरस्वती देवी प्राकट्य दिवस स्वर्णकार दिवस कि आप सभी को राष्ट्रीय अध्यक्ष की ओर से बहुत बहुत हार्दिक बधाई एवं अनंत मंगल शुभकामनाएं। बन्धुवर स्वर्णकार समाज के सभी घटक व संगठनों को एक दिन, एक साथ संयुक्त रूप से एकीकृत करने के प्रयास में, एक दिन, एक पर्व, पर सभी स्वर्णकार बंधुओं को, वो चाहे क्षत्रिय स्वर्णकार हों, वो चाहे मैढ क्षत्रिय स्वर्णकार हों, वो मालवीय स्वर्णकार हों , वो माहुर क्षत्रिय स्वर्णकार हों, वो अयोध्यावासी स्वर्णकार हों। मतलब पूरे देश मे विभिन्न नामों से वो कोई नाम से सोनी समाज घटक हों, वो अपने अपने आराध्य,या पितृ पुरुष या भगवान जिनका जब जिस दिन जैसा पूजन करते हों, उत्सव मनाते हों, वो वैसा तो आप अवश्य मनावे। पर हम सभी किसी भी घटक या संस्था से कोई भी हों सभी बन्धुवर साल में एक दिन एक बार स्वर्णकार दिवस के रूप में मना सकें। इसके लिए आज से 13 वर्ष पूर्व हम सब लोगों ने मिलकर एक भागीरथी प्रयास प्रारंभ किया और शुरुआत कि (कई महानगरों व तहसील में शुरूआत हो चुकी है) बसंत पंचमी को स्वर्णकार दिवस के रूप मे मनाने की। स्वर्णकार,समाज की आराध्या देवी मां सरस्वती देवी जो विद्या ज्ञान और कला की देवी मानी जाती हैं । जो इस पूरी सृष्टि के निर्माण की सूत्रधार हैं। हम सबकी आराध्या हैं । हम मां सरस्वती देवी के प्राकट्य य दिवस बसंत पंचमी पर वीणा वादनी देवी का पूजन करें व महाआरती करें। हम सब स्वर्णकार बंधु 23 जनवरी 2026 बसंत पंचमी को स्वर्णकार दिवस के रूप में मनायें । ऐसा हमारा सभी स्वर्णकार समाज के संगठनों से, सभी ग्रामीण, तहसील, जिला, प्रदेश, अध्यक्षों से, राष्ट्रीय प्रदेश पदाधिकारीयों के साथ महिला मंडल सहित सभी सदस्यों से करबद्ध निवेदन है कि हम एक दिन, एक देवी के आशीर्वाद के तले पूरे देश में स्वर्णकार दिवस के रूप में मनायें।
उस दिन अपनी अपनी क्षमता के अनुसार लोग चल समारोह जूलूस , रथयात्रा, कलश यात्रा आदि निकालकर या कहीं एक जगह किसी सभागार मे इकट्ठे होकर या किसी मंदिर प्रांगण में एकत्रित हो। मां सरस्वती की पूजन, महाआरती का आयोजन करें ल अपनी व्यवस्था अपनी क्षमता के साथ परिवार सहित नारी शक्ति को साथ लेकर (पीत वस्त्र पहन कर, प्रसाद वितरण कर) हर्ष उल्लास और गर्व के साथ,आयोजित कर, अपने आप को परिवार को, समाज के साथ अपने स्वर्णकार होने को गौरवान्वित करें । हमारे स्वर्णकार समाज कि आराध्या, विद्या, ज्ञान, कला की देवी पूरी सृष्टि के निर्माण कि सूत्रधार मां सरस्वती महादेवी जी का आशीर्वाद प्राप्त कर, सम्पूर्ण स्वर्णकार समाज को एक करने में समाज को शिक्षित समृद्ध, स्वस्थ, कर उत्थान करने में, समाजिक समरसता के साथ समाज को राष्ट्र की अग्रिम पंक्ति लाने में अपना अमूल्य योगदान दे।

