
नर्मदापुरम / सोहागपुर के रघुवंशी मोहल्ला से निकलकर राष्ट्रीय और वैश्विक मंच तक पहुंचा एक संकल्प, जिसने नर्मदापुरम को गौरव और युवाओं को नई दिशा दी। कुछ कहानियां केवल सफलता का ब्यौरा नहीं होतीं, वे मिट्टी, संस्कार और संघर्ष की वह दास्तान होती हैं, जो समय के साथ मिसाल बन जाती हैं। नर्मदा के शांत प्रवाह और सोहागपुर की साधारण गलियों के बीच पली-बढ़ी यह कहानी है शिवम मिश्रा की, एक ऐसे युवा उद्यमी की, जिसने छोटे शहर की सीमाओं को नहीं, बल्कि अपनी सोच को बड़ा बनाया।
सोहागपुर नगर के रघुवंशी मोहल्ला से गहरे पारिवारिक और भावनात्मक संबंध रखने वाले शिवम मिश्रा, श्रीमती किरण मिश्रा एवं स्वर्गीय श्री गोविंद मिश्रा के सुपुत्र हैं। उनका ननिहाल इसी रघुवंशी मोहल्ला में है, जहां आज भी उनकी उपलब्धियों को परिवार, पड़ोस और अंचल अपने सपनों की तरह देखता है। यहीं से उन्होंने जीवन की पहली सीख पाई —संघर्ष से भागना नहीं, उसे स्वीकार करना। महज 21 वर्ष की आयु में, जब अधिकांश युवा अपने भविष्य को लेकर असमंजस में रहते हैं, शिवम मिश्रा ने दिल्ली जैसे महानगर में अपने सपनों की नींव रखी। उन्होंने आहा टेक सर्विसेज की स्थापना की—एक ऐसा कदम, जिसमें जोखिम भी था और उम्मीद भी। शुरुआती दिनों की चुनौतियां, सीमित संसाधन और अनिश्चित भविष्य—इन सबके बीच उन्होंने हार नहीं मानी, बल्कि हर असफलता को सीख में बदला। वर्ष 2019 शिवम मिश्रा के जीवन का निर्णायक मोड़ साबित हुआ। अमेरिकी कंपनी ‘एविक्स’ के साथ हुए सहयोग ने उनके काम को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। सोहागपुर से निकली सोच अब सीमाओं से परे जा चुकी थी। आज शिवम मिश्रा से जुड़ी टेक्नोलॉजी और डेटा आधारित सेवाएं भारत के 4,000 से अधिक लोकेशनों पर सक्रिय हैं—यह आंकड़ा नहीं, बल्कि वर्षों की तपस्या और विश्वास का प्रमाण है।
वे यू-डेटा आधारित प्लेटफॉर्म सहित कई इनोवेटिव प्रोजेक्ट्स के को-फाउंडर हैं, जहां तकनीक के साथ-साथ जिम्मेदारी और पारदर्शिता को भी प्राथमिकता दी गई है। स्टार्टअप इकोसिस्टम में शिवम मिश्रा को एक दूरदर्शी, संतुलित और गंभीर उद्यमी के रूप में देखा जाता है—जो तेज़ी से आगे बढ़ने के साथ अपने मूल्यों को नहीं छोड़ता। उनकी यात्रा को राष्ट्रीय स्तर पर वह क्षण मिला, जब उन्हें देश के प्रतिष्ठित “भारत के सुपर-फाउंडर” मंच पर आमंत्रित किया गया। यह मंच केवल सम्मान का नहीं, बल्कि उन सपनों का प्रतीक है, जो देश के भविष्य को आकार दे रहे हैं। इस कार्यक्रम का संचालन फिल्म अभिनेता सुनील शेट्टी द्वारा किया गया, जिसने मंच को गरिमा के साथ-साथ एक प्रेरक ऊर्जा भी दी।
शिवम मिश्रा की यह कहानी न केवल नर्मदापुरम बल्कि पूरे मध्य प्रदेश के युवाओं के लिए एक मौन संदेश है —
कि छोटा शहर कभी छोटी सोच नहीं देता और कि संघर्ष अगर ईमानदार हो, तो सफलता स्थायी बनती है।
आज शिवम मिश्रा का नाम केवल एक सफल उद्यमी के रूप में नहीं लिया जाता, बल्कि वे नर्मदा अंचल की उस आवाज़ के रूप में पहचाने जाते हैं, जो कहती है—
“अगर सपनों में सच्चाई हो, तो रास्ते अपने आप बनते चले जाते हैं।”

