

नर्मदापुरम / स्वामी विवेकानंद जयंती के अवसर पर नर्मदा आव्हान सेवा समिति नर्मदापुरम व्दारा अखिल भारतीय काव्य महोत्सव, सम्मान समारोह (कवि सम्मेलन) में मुख्य अतिथि के रूप में पंकज चौरे अध्यक्ष नगर पालिका परिषद इटारसी ,विशिष्ट अतिथियों मे प्रमोद पगारे , वरिष्ठ साहित्यक तथा प्रदेश के वरिष्ठ कवि बी.के. पटैल की अध्यक्षता में अनूठा आयोजन अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन सम्पन्न हुआ।कवि सम्मेलन देर शाम तक जारी रहा। देश के विभिन्न अंचलों से आए 45 युवा कवियों ने अपनी कविता, गीत, गजल, ओज, हास्य, व्यंग्य की रचनाओं से भाव विभोर कर दिया।मुख्यातिथि पंकज चौरे ने मुक्त कंठ से कार्यक्रम कि सराहना करते हुए आयोजक केप्टिन करैया को बधाई देते हुए कहां कि ऐसे आयोजन होते रहना चाहिए। विशिष्ट अतिथि प्रमोद पगारे ने कहा कि युवाओं के प्रेरणा श्रोता विवेकानंद जयंती पर शुभकामनाएं देते हुऐ कहा की युवा कवियों को प्रेरित करते हुए कहां की आप सभी युवा कवियों को देशहित , समाजहित एवं जनजाग्रति के लिए कविताएं लिखना चाहिए। अध्यक्षता करते हुऐ बी.के. पटैल ने कहा कि नर्मदा आव्हान समिति के युवा महोत्सव में आये प्रतिभावान कवि/कवियित्रियों के प्रति में आश्वस्त हूँ कि आप राष्ट्र और समाज के लोक कल्याण को ध्यान में रखते हुए उत्कृष्ट काव्य सृजन करके हिन्दी साहित्य को समृद्ध करेंगे। उन्होने कहाँ देश मे एक मात्र नर्मदा आव्हान सेवा समिति ही ऐसी संस्था है जो निशुल्क कवि समागम करती है। स्वागत भाषण कैप्टिन करैया ने दिया। अतिथि एवं कवियों का स्वागत केप्टिन करैया, विनोद सनोडिया, पवन प्रबल, अश्विन कुमार, एस.आर.धोटे, सावन कुमार नवीन हरियले, विनीता मालवीय ने फूल-मालाओं से किया। मां सरस्वती की पूजा अर्चना एवं स्वामी विवेकानंद के चित्र पर फूलमालाओं से कार्यक्रम प्रारंभ हुआ। सरस्वती वंदना पिपरिया से आई रोशनी रावत की प्रस्तुति से सम्मेलन का प्रारंभ हुआ। कवि सम्मेलन दो सत्रों मे किया गया। प्रथम सत्र का कुशल संचालन पवन प्रबल ने द्वितीय सत्र का सफल संचालन सुनील केहरी ने किया। अतिथियों की उपस्थिति मे नर्मदा आव्हान सेवा समिति के पदाधिकारियों ने युवा कवियों को स्मृति चिन्ह एंव युवा शब्द साधक प्रमाण पत्र से सम्मानित किया। चेतन जोशी (कांटाफोड़) ने “नील के कंठ हो या अमरकंठ हो”
“उसके द्वारे चलो उसके द्वारे चलो”
“इस जहां के भंवर से बचना है तो
नर्मदा के किनारे किनारे चलो”। पर हर हर नर्मद का गुनगान हुआ। कृष्ण कांत मूंदडा विदिशा ने “तूफ़ान में कश्ती का किनारा बनो कभी
यानी किसी की आँख का तारा बनो कभी
मां बाप की खिदमत से सवारों को नसीब को
तुम भी तो बुजुर्गों का सहारा बनो कभी” खूब सराही।
सावन कुमार हरदा ने
“वो भी अब क़ीमत देखकर ख़रीदता है चीज़ें
क्योंकि घर में बैटी जवान हो गई”
अश्वनी कुमार कटनी ने “दीपक राग’ सुनाना है” प्रस्तुत की।
छिंदवाड़ा के जय सांवरा ने “आशीष से उसके सफल सारे काम हो गए हासिल मुझकों मेरे सारे मक़ाम हो गए तीर्थों में जाने के बजाय चूम लेता हूं माँ के चरण, मन को लगता है “सांवरा” की चारों धाम हो गए” पर खूब वाहवाही लूटी ।
सिवनी से आये गीतकार विनोद अंजान ने “बेटे जब से हुए हें सयाने, देखो घर से चले है कमाने जिम्मेदारी ये अपनी उठाने, देखो घर से चले है कमाने।पर खूब वाहवाही लूटी।
कुशल संचालन कर रहें पंकज प्रबल ने “जीवन है संग्राम बता कर चले गये, कर्तव्य के नाम बता कर चले गये, रिश्ते नाते क्या होते है दुनिया में,रामयण में राम बताकर चले गयें।
बरेली के शिवराम मेहरा ने
“मन से कोशिश करने से धरती अम्बर भी झुक जाता है।
जो सुने गौर गद्दारों की उनका पौरुष मर जाता है।
केवल हुंकारे भर भरकर खुद को वीर कहोगे कब तक।
जो लड़े धर्म और राष्ट्र की खातिर वीर वही कहलाता है”।
नर्मदापुरम के नवीन हरियले ने “मान और सम्मान, आपको अर्पण करके,
आपको ही जीवन, सर्वस्व समर्पण करके!
नफ्ज़ त्यागकर रूह,समाहित करें आपने,
और करें आपकी खोज, आपको दर्पण करके”
महक केवट दमोह आई ने भी शानदार प्रस्तुति दी।
नरसिंहपुर से आई मेघा मिश्रा ने कहाँ की “सफर को आखिरी अंजाम तक लेकर के जाऊंगी, अभी हारी नही हूँ मै मुझमें जान बाकी है” ने खूब ताली बटोरी। पिपरिया की रोशनी रावत ने कृष्ण के प्रेम को पा सके ध्यान में
हर किसी के हृदय की यही चाह है।
अन्य कवियों
प्रेम प्रसून धौलपुर, सोम सोलंकी, हितेंद्र शर्मा करौली राजस्थान, निहाल छीपा गाडरवाडा,अभिषेक मेहरा बोहानी, कृष्ण कांत मूंदडा विदिशा, गौरव बरखने सिवनीमालवा, रुप सिंह सिहोर, मिथलेश लोधी, नमन चौकसे, नीतिराज चौरे, जसवंत सिंह, कमलेश बंसत गंजबासौदा, नीरज हनोतिया सिवनीमालवा, श्रीराम यादव कटनी, शिवराज मेहरा, माखनलाल कहार, नवीन गौर रोझरा, प्रियंका पटैल तेदूंखेडा, मेहक केवट दमोह, मेघा मिश्रा, रोशनी रावत, रंजना गौतम, मंगला केवट, प्रमिला किरण, विनिता मालवीय सहित अन्य कवियों ने देर शाम तक श्रोताओं को खूब गुदगुदाय एवं लोट पोट करते हुए बांधे रखा।
कार्यक्रम का संचालन विनोद सनोडिया एवं डाँ. सतीश समी ने आभार प्रर्दशन किया।

