नर्मदापुरम / शासकीय गृहविज्ञान स्नातकोत्तर अग्रणी महाविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई द्वारा गोदग्राम डोंगरवाड़ा में राष्ट्रीय सेवा योजना सात दिवसीय विशेष शिविर प्राचार्य डॉ. श्रीमती कामिनी जैन के मार्गदर्शन एवं कार्यक्रम अधिकारी डॉ. हर्षा चचाने और पूजा गोस्वामी के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। शिविर के पांचवें दिवस की शुरुआत समूह क्रमांक 3 शक्तिसमूह द्वारा ग्राम में प्रभात फेरी निकाल कर की गई एवं योग, मेडिटेशन एवं परेड भी करवाई गई। परियोजना कार्य के अंतर्गत आंगनबाड़ी प्रांगण गमें साफ सफाई कर दीवार पर नारे लेखन का कार्य किया गया साथ ही एवं आंगनबाड़ी में बच्चों को टाफी एवं बिस्किट बांटे गए, छोटे-छोटे बच्चों द्वारा कविता सुनाई गई साथ ही बाल संरक्षण एवं मानव तस्करी जागरूकता हेतु ग्राम में समूह क्रमांक 5 जागृति समूह द्वारा नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया गया। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अलका राजपूत ने भी अपना सहयोग प्रदान किया एवं साथ ही शिविर नायक दुर्गा सूर्यवंशी द्वारा इंटरनेशनल प्रेरणा कॉन्वेंट के बच्चों को परिसर में गुड टच , बेड टच , बाल अधिकार एवं चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 के बारे में बताया गया। श्रम सीकर में स्वयं सेवकों को एन.एस.एस संडे स्पेशल सीरीज के बारे में बताया गया एवं साथ ही राष्ट्रीय सेवा योजना के गीत अब जाग उठो कमर कसो , शांति के सिपाही , सद्भावना गीत, जय जगत एवं विभिन्न गीतों का गायन किया गया। पांचवें दिवस के बौद्धिक सत्र की शुरुआत मां सरस्वती जी एवं युवाओं के प्रेरणा पुरुष स्वामी विवेकानंद के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं माल्यार्पण के साथ की गई एवं अतिथियों का स्वागत हस्त निर्मित मुकुट जिसे स्वयंसेवक मीरा चौहान द्वारा बनाया गया एवं अतिथि द्वारा शिविर दर्पण का प्रकाशन किया गया। जो कि समूह क्रमांक 4 कर्मयोगी समूह द्वारा बनाया गया था। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि सब इंस्पेक्टर अमृता दीक्षित एस.डी.आर.एफ नर्मदापुरम, केंद्रीय विद्यालय से श्रीमती शीला चौधरी, गुणानंद चौधरी एवं महाविद्यालय से डॉ. संध्या राय, डॉ. अमित मन्हास, डॉ. राहुल चौहान, नारायण सिंह उपरेलिया, डॉ. घनश्याम डहेरिया, डॉ. देवाहूति खंडाइत डॉ. वर्षा उपस्थित रहीं।
एस.आई. एसडीआरएफ अमृता शर्मा द्वारा मार्गदर्शन में आपदा प्रबंधन, आपातकालीन स्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया एवं आत्म-सुरक्षा के महत्वपूर्ण उपायों की जानकारी दी गई। उन्होंने प्राकृतिक आपदाओं के समय घबराहट से बचते हुए सही निर्णय लेने पर जोर दिया। साथ ही प्राथमिक उपचार, सुरक्षित निकासी तथा टीमवर्क के महत्व को समझाया। एवं बताया कि आज के समय में महिलाओं का आत्मनिर्माण निर्भर एवं शिक्षित होना अति आवश्यक है।
केंद्रीय विद्यालय से श्रीमती शीला चौधरी ने अपने व्यक्तिगत अनुभवों के माध्यम से व्यक्तित्व विकास के महत्वपूर्ण पहलुओं को साझा किया। उन्होंने बताया कि जीवन में आई चुनौतियों से सीख लेकर ही आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच विकसित होती है। साथ ही अपने अनुभवों से अनुशासन, निरंतर प्रयास एवं सही संवाद के महत्व को समझाया। डॉ. संध्या राय ने शिविर में सुबह से शाम तक स्वयंसेवकों द्वारा बनाए गए उत्कृष्ट अनुशासन की सराहना की। उन्होंने कहा कि समयपालन, सहभागिता और समर्पण को देखकर यह शिविर अपने आप में अत्यंत सफल प्रतीत होता है। डॉ. नारायण सिंह ने कहा कि ग्राम एवं समुदाय से जुड़कर जिस प्रकार इस शिविर में उत्कृष्ट कार्य किया जा रहा है, वह सराहनीय है। उन्होंने बताया कि समाज के वास्तविक मुद्दों को समझकर सेवा करना ही एनएसएस की सच्ची भावना है। यह शिविर सहभागिता, समर्पण एवं सामाजिक चेतना का सुंदर उदाहरण है। अध्यक्ष उद्बोधन में स्वयंसेवक रागिनी पासी ने सभी को अपनी शुभकामनाएं प्रेषित की और कहा कि यह शिविर छात्राओं के हित में सहायक सिद्ध होगा। कार्यक्रम का मंच संचालन सौम्या पाल एवं आभार शिवानी चौरे द्वारा किया गया। शाम के समय ग्रामीण बच्चों एवं स्वयंसेवकों के लिए तात्कालिक भाषण आयोजित किया गया। जिसमें प्रथम द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाली छात्राओं को पुरूष्कृत किया जाएगा एवं रात्रि के समय सांस्कृतिक कार्यक्रम में छात्रों द्वारा विभिन्न राज्यों के लोक नृत्य एवं गीत प्रस्तुत किए गए साथ ही ग्रामीण बच्चों ने भी अपनी प्रस्तुति दी।

