
नर्मदापुरम / शासकीय गृहविज्ञान स्नातकोत्तर अग्रणी महाविद्यालय में दिनांक 02 सितम्बर 2026 को बलराम जन्मोत्सव के अवसर पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर भगवान बलराम एवं श्री कृष्ण के प्रसंगो, उनके अवदान एवं लोक कल्याणकारी जीवन गाथा से संबंधित कथाएं, जानकारी साझा की गई एवं इसी श्रंखला में पेड़ों पर राखी बांधकर उनकी रक्षा के लिए संकल्प लिया। इस अवसर पर महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. संगीता अहिरवार, प्रशासनिक अधिकारी डॉ. जी सी पांडे, डॉ. हर्षा चचाने ने मंच पर अपनी गरिमामई उपस्थिति प्रदान की। इस अवसर पर भगवान बलराम के चित्र के समक्ष माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया ।
महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. संगीता अहिरवार ने अपने उद्बोधन में कहा कि प्रतिवर्ष तिथि अनुसार हलछठ को जन्मोत्सव मनाया जाता है। बलराम जी को शक्ति, कृषि और बल के देवता माने जाते हैं। भगवान बलराम श्री कृष्ण के बड़े भाई और ब्रज के राजा के रूप में पूजनीय है। द्वापर युग में अवतरित भगवान बलराम को स्नेहपूर्वक दाऊभैया भी कहा जाता है। बलराम जी को बलदेव, बलभद्र और हलायुद्ध भी कहा जाता है। उनका हल शक्ति, कृषि और गुरु तत्व का प्रतीक है। हल उनकी शारीरिक शक्ति, कृषि से उनके संबंध और गुरु के रूप में उनकी भूमिका को दर्शाता है। श्री कृष्ण गौपालक थे और बलराम कृषक। इसलिए बलराम कृषकों के आराध्य हैं।
प्रशासनिक अधिकारी डॉ. जी सी पांडे ने अपने उद्बोधन में बताया कि भगवान बलराम गदायुद्ध, मल्लयुद्ध के आचार्य, युद्धकला में निपुण, बड़े योद्धा थे। इंडो यूनानी सिक्कों पर भगवान बलराम, कृष्ण के चित्र मिलते हैं। बलरामजी का जीवन अत्यंत प्रेरणादायक है। गदा के आचार्य के रूप में भीम ओर दुर्याेधन को शिक्षा दी, इसीलिए महाभारत युद्ध के समय बलराम जी तटस्थ रहे।
डॉ. हर्षा चचाने ने भगवान बलराम के जन्म ,माता-पिता, और शौर्य गाथा से छात्राओं को अवगत कराया।
कार्यक्रम का सफल संचालन कु. काजल बाथरे ने एवं आभार कुमारी पूजा गोस्वामी ने किया। इस अवसर पर डाॅ. रश्मि श्रीवास्तव, डॉ. धर्मेंद्र सिंह, डाॅ. हेमंत चैधरी, डाॅ. विजया देवासकर, श्रीमती शिवानी जोशी, बलराम यादव, मनोज सिसेदिया, राजेश यादव, कुमारी ईशा शास्त्री महाविद्यालयीन स्टाफ एवं छात्राएं उपस्थित रहीं।

