
नर्मदापुरम / प्राकृतिक वनीकरण को बढ़ावा देने एवं पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से संचालित नवांकुर अभियान के अंतर्गत मंगलवार को जिले की समस्त जनपद पंचायतों, तहसीलों एवं नगरीय निकायों में एक साथ 2 लाख से अधिक सीड बॉल का व्यापक स्तर पर प्रसार किया जाएगा। कलेक्टर श्री सोमेश मिश्रा जनपद पंचायत नर्मदापुरम के ग्राम हासलपुर में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होकर पौधारोपण एवं सीड बॉल का प्रसार करेंगे। कलेक्टर श्री मिश्रा ने जिले के सभी अनुविभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि नवांकुर अभियान के तहत अपने-अपने क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर सीड बॉल का प्रसार सुनिश्चित करें, जिससे प्राकृतिक वनीकरण को गति मिले और अधिक से अधिक वृक्ष विकसित हो सकें।
उल्लेखनीय है कि “बीज से वृक्ष तक” के संकल्प के साथ विश्व पर्यावरण दिवस (5 जून) से प्रारंभ हुए नवांकुर अभियान के अंतर्गत जिले में अब तक 2 लाख से अधिक सीड बॉल का निर्माण किया जा चुका है। इस अभियान में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, नगरीय निकाय, मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद, उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग, उच्च शिक्षा विभाग तथा जेल प्रशासन विभाग की महत्वपूर्ण सहभागिता रही है। विभिन्न विभागों के समन्वित प्रयासों से तैयार किए गए सीड बॉल का मंगलवार को जिलेभर में चयनित स्थलों पर प्रसार किया जाएगा, जिससे वर्षा ऋतु में बीजों के अंकुरित होकर पौधों के रूप में विकसित होने की संभावना बढ़ेगी और हरित आवरण में वृद्धि होगी।
सीड बॉल की विशेषता…..
वर्षा ऋतु में प्राकृतिक वनीकरण को बढ़ावा देने और पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से सीड बॉल (Seed Ball) तकनीक को प्रभावी एवं सरल उपाय के रूप में अपनाया जा रहा है। इस तकनीक के माध्यम से कम लागत में बड़े पैमाने पर स्थानीय वृक्षों का रोपण किया जा सकता है, जिससे हरित आवरण बढ़ाने के साथ-साथ जैव विविधता का संरक्षण भी संभव है।
सीड बॉल का निर्माण देशी एवं स्थानीय वृक्ष प्रजातियों के बीजों को चिकनी मिट्टी और गोबर खाद अथवा कम्पोस्ट के मिश्रण से किया जाता है। इसके लिए चिकनी मिट्टी के 5 भाग तथा गोबर खाद या कम्पोस्ट का 1 भाग अच्छी तरह मिलाया जाता है। मिश्रण का छोटा भाग लेकर उसमें 1 से 2 बीज रखकर लगभग 2 से 3 सेंटीमीटर व्यास की गोल गेंद तैयार की जाती है। तैयार सीड बॉल को 24 से 48 घंटे तक छाया में सुखाया जाता है। इसके बाद इन्हें वर्षा ऋतु में खाली भूमि, पहाड़ी क्षेत्रों एवं वन क्षेत्रों में बिखेरा जाता है।
सीड बॉल तकनीक का प्रमुख लाभ यह है कि मिट्टी की परत बीजों को पक्षियों, कीटों तथा अन्य प्राकृतिक नुकसान से सुरक्षित रखती है। वर्षा होने पर सीड बॉल धीरे-धीरे टूट जाती है और बीजों को अंकुरण के लिए अनुकूल वातावरण प्राप्त होता है। इससे पौधों के विकसित होने की संभावना बढ़ जाती है तथा प्राकृतिक रूप से हरित क्षेत्र का विस्तार होता है। इस तकनीक के लिए नीम, करंज, गुलमोहर, अमलतास, शीशम, अर्जुन, जामुन, इमली, बांस सहित अन्य स्थानीय वृक्ष प्रजातियों के बीज उपयुक्त माने जाते हैं। स्थानीय प्रजातियों का उपयोग क्षेत्र की जलवायु और मिट्टी के अनुरूप होने के कारण पौधों की जीवित रहने की संभावना अधिक रहती है।

