नर्मदापुरम / कानून व्यवस्था और पुलिसिया चौकसी को ठेंगा दिखाते हुए करीब एक साल से फरार चल रहा आरोपी सुशील गोयल आज भी पुलिस की गिरफ्त से दूर है। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि पुलिस रिकॉर्ड में ‘फरार’ यह आरोपी कहीं छिपा नहीं है, बल्कि शहर में सरेआम घूम रहा है। हाल ही में जैन समाज के एक सार्वजनिक कार्यक्रम में उसकी खुलेआम मौजूदगी ने नर्मदापुरम पुलिस की मुस्तैदी और खुफिया तंत्र की पोल खोल कर रख दी है। पुलिस की नाक के नीचे ‘विशिष्ट उपस्थिति’ प्राप्त जानकारी के अनुसार, पुलिस की विभिन्न टीमें और स्थानीय थाना पुलिस जिस आरोपी को महीनों से ‘तलाश’ करने का दावा कर रही हैं, वह हाल ही में आयोजित जैन समाज की संस्था के एक कार्यक्रम में बेखौफ शामिल नजर आया। कार्यक्रम के दौरान पुलिस विभाग और स्थानीय प्रशासन के तंत्र की मौजूदगी के बावजूद आरोपी का इस तरह सरेआम घूमना विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। जांच और मुस्तैदी पर खड़े होते 3 बड़े सवाल कागजी कार्रवाई तक सीमित पुलिस जो पुलिस अमला आम मामलों में त्वरित कार्रवाई का दम भरता है, वह एक साल से नामजद आरोपी को पकड़ने में नाकाम क्यों है? क्या आरोपी को तलाशने की कवायद सिर्फ कागजों तक ही सीमित है?
खुफिया विभाग की घोर लापरवाही….
जिले का खुफिया तंत्र इतना निष्क्रिय कैसे हो सकता है कि शहर के एक बड़े सामाजिक आयोजन में फरार आरोपी वीआईपी की तरह घूमता रहे और स्थानीय पुलिस को भनक तक न लगे मौन संरक्षण की आशंका सरेआम घूमते आरोपी पर पुलिस का हाथ न डालना जनता के बीच यह संदेश दे रहा है कि कहीं आरोपी को कोई रसूखदार प्रशासनिक या राजनीतिक मौन संरक्षण तो प्राप्त नहीं है? जनता में गहराता आक्रोश कानून के इकबाल को खुली चुनौती देने वाली इस घटना के बाद स्थानीय नागरिकों और प्रबुद्ध वर्ग में भारी आक्रोश है। एक फरार आरोपी का इस तरह बेखौफ होकर सामाजिक मंचों पर दिखाई देना पुलिस की साख को बट्टा लगा रहा है। अब देखना यह है कि इस गंभीर लापरवाही के उजागर होने के बाद नर्मदापुरम पुलिस के आला अधिकारी क्या कड़ा कदम उठाते हैं, या फिर आरोपी इसी तरह कानून का मजाक उड़ाता रहेगा। आखिर इस बात से यह भी सिद्ध होता है कि आरोपी प्रभावशाली है या गरीब। किस प्रकार कार्यवाही करना है और किस पर नहीं। आखिर कब तक होगी आरोपी की गिरफ्तारी।

