
नर्मदापुरम / सतपुड़ा की रानी पचमढ़ी की मनमोहक वादियों में नर्मदापुर युवा मंडल नर्मदापुरम एवं सुरीला नर्मदापुरम परिवार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय “संगीत सुर-ताल कार्यशाला” का रविवार को उत्साहपूर्ण माहौल में समापन हुआ। संजय गांधी संस्थान में आयोजित इस कार्यशाला में जिले सहित आसपास के क्षेत्रों से आए 70 से अधिक गायक एवं संगीत प्रेमियों ने भाग लेकर संगीत की नई विधाओं और तकनीकों का प्रशिक्षण प्राप्त किया। कार्यशाला के दूसरे दिन दो अलग-अलग सत्र आयोजित किए गए, जिनमें संगीत गुरु डॉ. कमल झा ने प्रतिभागियों को शास्त्रीय एवं सुगम संगीत की बारीकियों, सुर-ताल के संतुलन, स्वर साधना, लयबद्ध प्रस्तुति, आवाज की गुणवत्ता सुधारने के तरीके तथा मंच संचालन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। प्रतिभागियों ने व्यावहारिक अभ्यास के माध्यम से संगीत की विभिन्न तकनीकों को सीखा और अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन भी किया। प्रशिक्षण कार्यक्रम के संयोजक मनीष परदेशी ने बताया कि कार्यशाला का उद्देश्य स्थानीय प्रतिभाओं को अनुभवी संगीत विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में बेहतर मंच उपलब्ध कराना तथा संगीत के प्रति युवाओं की रुचि को प्रोत्साहित करना है। उन्होंने बताया कि भविष्य में भी इस प्रकार की कार्यशालाओं का आयोजन लगातार किया जाएगा, जिससे क्षेत्र की उभरती हुई प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का अवसर मिल सके। कार्यशाला के समापन सत्र में संगीत के सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक पक्षों पर विशेष सत्र आयोजित किए गए, जिनमें रियाज की सही पद्धति, सुरों की शुद्धता, ताल की समझ और प्रभावी गायन शैली पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यशाला के अंत में सभी प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र नर्मदापुर युवा मंडल अध्यक्ष अखिलेश खंडेलवाल, भाजपा नर्मदापुर मंडल अध्यक्ष रुपेश राजपूत, भाजयुमो पचमढ़ी मंडल अध्यक्ष शशांक साहू, रूपेंद्र साहू द्वारा दिया गया। प्रतिभागियों ने इसे अपने संगीत जीवन के लिए अत्यंत उपयोगी बताया और आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त किया। शनिवार शाम को सुरीला नर्मदापुरम संगीत कार्यक्रम के एक वर्ष पूर्ण होने पर संगीत संध्या का कार्यक्रम भी संजय गांधी संस्थान परिसर में हुआ। संगीत कालकारों ने एक से बढ़कर एक नए एवं पुराने फिल्मी गीत गाए। इस कार्यक्रम में साड़ा के पूर्व अध्यक्ष कमल धूत, संजय लीडवानी, भाजपा पूर्व मंडल अध्यक्ष चंद्रकांत अग्रवाल सहित पचमढ़ी के अन्य जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे।

