
इटारसी / ओझा बस्ती में अधूरे पड़े आवास निर्माण कार्यों के कारण अनेक परिवारों की परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। बारिश का मौसम समय से पहले दस्तक दे चुका है और पिछले दिनों हुई वर्षा ने प्रभावित परिवारों की मुश्किलों को और उजागर कर दिया है। कई मकानों में केवल कॉलम खड़े किए गए हैं, जबकि लिंटर का कार्य अब तक पूरा नहीं हो पाया है, जिससे लोगों के सामने अपने परिवार को बारिश से बचाने का संकट खड़ा हो गया है।
बारिश के दौरान अधिवक्ता सिद्धार्थ महेश आर्य स्वयं ओझा बस्ती पहुंचे और प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। क्षेत्रवासियों ने बताया कि मकानों का निर्माण अधूरा होने के कारण उनके पास अपने बच्चों और परिवार के साथ सुरक्षित रूप से रहने के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। कई परिवारों के सामने सबसे बड़ी चिंता यह है कि बारिश के दौरान अपने सिर को बचाने के लिए उनके पास पक्की छत उपलब्ध नहीं है।
निरीक्षण के दौरान सिद्धार्थ आर्य ने देखा कि छोटे-छोटे बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग अत्यंत कठिन परिस्थितियों में जीवनयापन कर रहे हैं। बारिश का पानी घरों में प्रवेश कर रहा है और लोगों को लगातार भय बना हुआ है कि यदि वर्षा का सिलसिला बढ़ा तो उनकी परेशानियां और बढ़ जाएंगी।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सिद्धार्थ आर्य ने आसपास के नागरिकों से भी मानवीय सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के पास सुरक्षित छत एवं पर्याप्त स्थान उपलब्ध है, वे ऐसे जरूरतमंद परिवारों की यथासंभव सहायता करें, ताकि बारिश के दौरान कोई परिवार खुले आसमान के नीचे रहने के लिए मजबूर न हो।
सिद्धार्थ आर्य ने कहा कि किसी भी परिवार को अपने ही घर में असुरक्षित महसूस नहीं करना चाहिए। जब बारिश का मौसम शुरू हो चुका है, तब अधूरे निर्माण कार्यों को शीघ्र पूरा कराया जाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने संबंधित विभाग एवं प्रशासन से मांग की कि ओझा बस्ती में लंबित लिंटर कार्य को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूर्ण कराया जाए, जिससे प्रभावित परिवारों को राहत मिल सके और उन्हें सुरक्षित आवास उपलब्ध हो सके।
उन्होंने कहा कि विकास कार्यों का उद्देश्य नागरिकों को सुविधा प्रदान करना है, न कि उन्हें लंबे समय तक कठिनाइयों में छोड़ देना। प्रशासन को इस विषय को गंभीरता से लेते हुए त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि ओझा बस्ती के परिवारों को आगामी वर्षा ऋतु में और अधिक परेशानियों का सामना न करना पड़े।

