
नर्मदापुरम / हरिद्वार / समाजसेवा, कला, साहित्य, संस्कृति को सर्मपित संस्था नर्मदा आव्हान सेवा समिति नर्मदापुरम व्दारा इस वर्ष उत्तराखंड में माँ गंगा के तट पर स्थित हरिद्वार हिंदू धर्म के सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक है। इसका नाम हरि’ (भगवान विष्णु) और ‘द्वार’ (प्रवेश द्वार) से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है “ईश्वर का द्वार” में अखिल भारतीय काव्य महोत्सव एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।
जिसका संयोजन केप्टिन किशोर करैया ने तथा कार्यक्रम की अध्यक्षता ब्रिजेन्द्र हर्ष ने किया। दिल्ली से उपस्थित अनुराधा पाण्डेय मुख्य अतिथि रहीं तथा अनिल मिश्र, विजय बागरी, सुनील केहरी आदि विशिष्ट आतिथि रहें।देश के विभिन्न प्रांतों से उपस्थित 35 से अधिक कवि/कवयित्रियों ने काव्यपाठ किया। जिसमें कार्यक्रम का प्रारंभ सरस्वती वंदना तथा स्वागत गान से देवाशीष अग्रवाल तथा आराध्य अग्रवाल द्वारा हुआ। स्वागत भाषण केप्टिन करैया ने दिया काव्यपाठ का प्रारंभ कार्यक्रम के सबसे छोटे कवि अवनीत ‘आज़ाद’ द्वारा – “वो नाम एक अकम्प सा भूताल में भूकंप सा, विकास का, विनाश का वो नाम एक स्वांस का”, ओज कवयित्री अपराजिता उन्मुक्त द्वारा – “राम के स्वर का तुम जाप करना सीख लो, कर्म में श्रीराम को सिद्धांत करना सीख लो “, रौशनी रावत द्वारा – “हूँ मैं कालिदास की शकुंतला, रामायण की गाथा हूं” डॉ. शिरीष अग्रवाल द्वारा – मुझे वो सांवली लड़की बहुत प्यारी सी लगती है”, सुधीर गुप्ता द्वारा -“जीवन की आपाधापी में यह बाग़ सजाया हरा भरा”, अभिलाषा स्नेह द्वारा – “जग में इतने सारे चेहरे सबमे एक तुम्हारा चेहरा, भूल नहीं पाया अंतर्मन साधारण सा प्यारा चेहरा”, प्रियंका पटैल द्वारा – “तोड़ के सारी जंजीरें अब हमने कदम उठाया है, गुरूर चूर चूर हुआ उसका जो हमसे टकराया है”, अनमोल चौहान द्वारा – वेद या पुराण देखो गीता या कुरान देखो, प्रेम नेम को सब उपासना बता रहे हैं” काव्यपाठ किया गया। मुख्य अतिथि अनुराधा पाण्डेय जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि कविता सभी को सुनाने की चीज नहीं, जब न ही यह सभी को प्राप्त होती है यह ईश्वर द्वारा प्राप्त वह प्रसाद है, जो सभी के हिस्से में नहीं आता। अपना हर्ष साझा करते हुए उन्होंने नर्मदा आह्वान सेवा समिति तथा कैप्टन करैया जी के उज्ज्वलंत भविष्य की कामना करते हुए अपना आशीर्वाद प्रदान किया। कार्यक्रम में सुनील केहरी, रौशनी रावत, ब्रजेश शर्मा, अशोक श्रीवास्तव, अमित बिल्लौरे, डॉ. शिरीष अग्रवाल, रामलखन सिंह, शिवानंद पटैल, अनिल कुमार, सुधीर गुप्ता, कविता राजपूत, अरविंद दुबे, सुभाष सिंह, मीरा पटैल, डॉ. प्रद्युम्न कुमार मिश्र आदि उपस्थित रहे। काव्य पाठ उपरांत सभी कवयित्रियों को अतिथियों की उपस्थिति में नर्मदा आव्हान सेवा समिति ने स्मृति चिन्ह एवं साहित्य मनीषी सम्मान से अंलकृत किया।

