
नर्मदापुरम / जिला प्रशासन और उद्यानिकी विभाग द्वारा स्थानीय आम उत्पादक किसानों को बढ़ावा देने और जिले के आमों की ब्रांडिंग के लिए आयोजित किया गया ‘आम महोत्सव’ प्रशासनिक अदूरदर्शिता और विभागीय सुविधा की भेंट चढ़ गया। प्रशासन ने जिले की पहचान को वैश्विक मंच पर ले जाने और किसानों के हितों को साधने के बजाय अपनी खुद की ‘प्रशासनिक सुविधा’ को प्राथमिकता दी। परिणाम यह रहा कि 40 किस्म के दुर्लभ और आकर्षक आमों की प्रदर्शनी सजने के बावजूद यह पूरा आयोजन एक सीमित दायरे में सिमट कर रह गया और किसानों को खरीददार तक नसीब नहीं हुए। पचमढ़ी में होता आयोजन तो बदल जाती तस्वीर जानकारों और कृषि विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि यदि यह आयोजन प्रदेश की इकलौती पर्यटन नगरी पचमढ़ी में किया जाता, तो इसकी तस्वीर बिल्कुल अलग होती। इन दिनों भीषण गर्मी के सीजन में पचमढ़ी देश-विदेश से आने वाले लाखों पर्यटकों से गुलजार है और वहां रोजाना हजारों की संख्या में सैलानी पहुंच रहे हैं। ऐसे में यदि आम महोत्सव पचमढ़ी में आयोजित होता, तो जिले के विशेष आमों का स्वाद और उनकी अनूठी पहचान देश के कोने-कोने से आए पर्यटकों तक पहुंच सकती थी। प्रशासन ने इस स्थान का चयन न करके जिले की ब्रांडिंग का एक बहुत बड़ा और सुनहरा मौका अपने हाथ से गंवा दिया। 40 किस्म के आम सजे, लेकिन नहीं पहुंचे खरीदार महोत्सव में क्षेत्र के बागवानों और किसानों ने अपनी कड़ी मेहनत से तैयार की गईं आमों की लगभग 40 से अधिक किस्में प्रदर्शित की थीं। किसानों को उम्मीद थी कि इस आयोजन से उनके उत्पादों को नई पहचान और वाजिब दाम मिलेंगे। लेकिन जिला मुख्यालय पर ऐतिहासिक सेठानी घाट स्थित तिलक भवन के सामने पर्यटकों और आम खरीदारों की भारी कमी के चलते स्थिति निराशाजनक रही। आयोजन स्थल पर आम तो सजे रहे, लेकिन उन्हें सराहने और खरीदने वाले लोग ही गायब थे।
सीधे शब्दों में कहें तो जहां खरीदार और पर्यटक मौजूद थे, वहां महोत्सव लेकर प्रशासन और उद्यानिकी विभाग पहुंचा ही नहीं; और जहां अधिकारी मौजूद थे, वहीं उनकी सुविधा के अनुसार आयोजन की औपचारिकता पूरी कर ली गई। इस घोर प्रशासनिक लापरवाही के कारण किसानों को सीधा नुकसान उठाना पड़ा है।”
अधिकारियों की जिद में सिमटी ‘पहचान’ इस महोत्सव का मुख्य उद्देश्य नर्मदापुरम के आमों को एक बड़ा बाजार और नई पहचान दिलाना था। परंतु, जमीनी हकीकत को नजरअंदाज कर बंद कमरों और सीमित परिसर में किए गए इस आयोजन ने प्रशासन के दावों की पोल खोलकर रख दी है। यदि यही आयोजन पचमढ़ी के खुले और व्यस्त पर्यटन केंद्रों पर होता, तो किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होती और नर्मदापुरम के हॉर्टिकल्चर (बागवानी) को राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी पहचान मिल सकती थी, जिससे प्रशासन और उद्यानिकी विभाग पूरी तरह चूक गया।

