


नर्मदापुरम / इसी प्रेरणादायक संदेश के साथ आज ईशान परिसर स्थित द चैम्प्स फन स्कूल में पृथ्वी दिवस का आयोजन अत्यंत जीवंत और उत्साहपूर्ण माहौल में किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत रामायण हॉल में आयोजित प्रार्थना सभा से हुई, जहाँ बच्चों ने नर्मदाष्टक का सामूहिक पाठ किया। इसके पश्चात एक आकर्षक एक्शन सॉन्ग प्रस्तुत किया गया, जिसने बच्चों को ऊर्जा और उत्साह से भर दिया। एक विशेष गतिविधि में बच्चों को बायोडिग्रेडेबल और नॉन-बायोडिग्रेडेबल वस्तुओं के बारे में समझाया गया। इस गतिविधि में बच्चों ने प्रतीकात्मक रूप से पृथ्वी को साफ करते हुए प्लास्टिक और कचरे को हटाकर उसकी जगह पौधे, फूल और पुनः उपयोग योग्य वस्तुओं को सजाया, जिससे पर्यावरण संरक्षण का सुंदर संदेश दिया गया। इसके बाद फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता ने सभी का ध्यान आकर्षित किया, जहाँ बच्चे पृथ्वी, फल, फूल और प्रकृति के विभिन्न रूपों में सजे नजर आए। बच्चों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से पृथ्वी को बचाने, पेड़ों की रक्षा करने और प्राकृतिक संसाधनों के महत्व को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के दौरान एक शिक्षाप्रद वीडियो भी दिखाया गया, जिसमें ग्लोबल वार्मिंग, वनों की कटाई, प्रदूषण और ऊर्जा संरक्षण जैसे विषयों को सरल तरीके से समझाया गया। वीडियो के बाद बच्चों ने अपने विचार साझा किए और पर्यावरण बचाने की आवश्यकता को महसूस किया। कुछ बच्चों ने मंच पर आकर प्रेरणादायक नारे प्रस्तुत किए, जिससे पूरे वातावरण में जागरूकता का संदेश गूंज उठा। विद्यालय के प्राचार्य डॉ. आशीष चटर्जी ने “मैं जमूरा, तू मदारी” नाटक के माध्यम से बच्चों को पर्यावरण संरक्षण, ऊर्जा बचत और पृथ्वी के महत्व को सरल और रोचक अंदाज में समझाया। उनकी कहानी ने बच्चों को गहराई से प्रभावित किया। अंत में प्राचार्य ने विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण का संकल्प दिलवाया ताकि वे पृथ्वी को स्वच्छ, हरित और सुरक्षित बनाए रखने में अपना योगदान दें। उन्होंने जल और बिजली की बचत, प्लास्टिक से दूरी और Reduce, Reuse, Recycle के सिद्धांतों को अपनाने का वादा किया। कार्यक्रम के समापन पर बच्चों ने चित्रकला के माध्यम से “सेव अर्थ” नमक लंबे पोस्टर में सामूहिक रूप से रंग भरकर उत्तम संदेश प्रस्तुत किया। इस अवसर पर विद्यालय की डायरेक्टर श्रीमती जूही चटर्जी एवं प्राचार्य डॉ. आशीष चटर्जी की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम का सफल संचालन सुश्री मनीषा तोमर द्वारा किया गया। यह आयोजन बच्चों के लिए न केवल आनंददायक रहा, बल्कि उनके भीतर प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी और संवेदनशीलता का भाव भी जागृत कर गया।

