
नर्मदापुरम / माखननगर क्षेत्र में पिछले दिनों हुए जानलेवा हमले के मामले में अब एक बड़ा खुलासा सामने आया है। पीड़ित ने पुलिस को दिए आवेदन में सीधे तौर पर जीवन मीणा को इस पूरी वारदात का मुख्य सूत्रधार (मास्टरमाइंड) करार दिया है। आवेदन में न केवल हमले की साजिश रचने, बल्कि जीवन मीणा पर फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं।
सुपारी देकर कराया गया हमला…..
पीड़ित का स्पष्ट आरोप है कि यह हमला अचानक हुई कोई घटना नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साजिश है। आरोप के मुताबिक, जीवन मीणा ने आपसी रंजिश के चलते ‘सुपारी’ देकर इस हमले को अंजाम दिलवाया है। पीड़ित ने आशंका जताई है कि यदि गहराई से जांच हुई, तो जीवन मीणा के काले कारनामों की एक लंबी फेहरिस्त सामने आ सकती है।
पुलिस की भूमिका पर संदेह और ‘फिक्स्ड’ गिरफ्तारी का आरोप
समाचार के सबसे चौंकाने वाले पहलू में पीड़ित ने पुलिस की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा किया है। पीड़ित के अनुसार:..
* आरोपी नीरज मीणा को एक सोची-समझी रणनीति के तहत मंडीदीप थाने के किसी पुराने मामले में गिरफ्तार करवाया गया है।
* यह गिरफ्तारी इसलिए दिखाई गई है ताकि माखननगर पुलिस उससे पूछताछ न कर सके और हमले के पीछे छिपे ‘सफेदपोश’ चेहरों के नाम दफन रहें।
* स्थानीय पुलिस पर दबाव के चलते निष्पक्ष जांच न करने का आरोप लगाते हुए मामले को किसी अन्य थाने में स्थानांतरित करने की मांग की गई है।
सच्चाई उगलवाने के लिए ‘साइंटिफिक टेस्ट’ की मांग….
पीड़ित ने न्याय के लिए उच्च स्तरीय वैज्ञानिक जांच की गुहार लगाई है। आवेदन में मांग की गई है कि आरोपी नीरज मीणा का:….
1. नारको टेस्ट (Narco Test)
2. पॉलीग्राफिक टेस्ट (Polygraph Test)
3. और ब्रेन मैपिंग (Brain Mapping) कराई जाए।
इससे यह साफ हो सकेगा कि इस हमले की पटकथा लिखने में और कौन-कौन से रसूखदार लोग शामिल हैं।
प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती……
एक तरफ जानलेवा हमला और दूसरी तरफ सरकारी नौकरी में फर्जीवाड़े का आरोप— इन दोनों बिंदुओं ने जिला प्रशासन और पुलिस विभाग के सामने कड़ी चुनौती पेश कर दी है। अब देखना यह है कि क्या प्रशासन इस मामले में निष्पक्ष जांच कराकर असली ‘मास्टरमाइंड’ तक पहुंच पाता है या नहीं।

