
नर्मदापुरम / मध्य प्रदेश के स्थित प्रसिद्ध सतपुड़ा टाइगर रिज़र्व (STR) के कोर क्षेत्र के पास से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ केसला थाना क्षेत्र में एक बाघ ने ग्रामीण पर जानलेवा हमला कर दिया और उसे अपना शिकार बना लिया। घटना इतनी भयानक थी कि बाघ ने व्यक्ति को मारने के बाद उसके शरीर के अंग खा लिए और कई घंटों तक शव के पास ही डटा रहा। इस घटना से पूरे इलाके में दहशत का माहौल है।
साक्षी की आप बीती और मृतक की पहचान……
जानकारी के अनुसार, मृतक की पहचान सुधराम चौहान (उम्र 49 वर्ष) पिता हजारी चौहान, निवासी ग्राम चनागढ़-झुनकर के रूप में हुई है। सुधराम बुधवार सुबह अपने एक साथी, गुड्डू उर्फ़ मोनू के साथ महुआ बीनने के लिए तवा नदी पार कर जंगल के अंदर गए थे। मोनू ने बताया कि जंगल में पहुँचने के बाद दोनों अलग-अलग जगहों पर महुआ बीनने चले गए। शाम को काम ख़त्म होने पर, मोनू पहले से तय जगह पर नाव के पास पहुँचा, लेकिन सुधराम काफी देर तक नहीं आया। जब सुधराम शाम करीब 6 बजे तक भी नहीं लौटा, तो मोनू अकेले ही गाँव आ गया। सुधराम के घर न पहुँचने पर परिजन चिंतित हो गए और उनकी खोजबीन शुरू कर दी गई।
रातभर तलाश और सुबह बाघ की दहाड़ से मिला सुराग….
परिजनों और ग्रामीणों ने रात में ही जंगल में सुधराम की तलाश शुरू की, लेकिन रात के अँधेरे और घने जंगल में कोई सुराग नहीं मिल पाया। गुरुवार सुबह करीब 6 बजे, जब ग्रामीणों का समूह फिर से जंगल में तलाशी ले रहा था, तभी उन्हें बाघ के दहाड़ने की तेज आवाज़ सुनाई दी।
आवाज़ की दिशा में सतर्कता से बढ़ते हुए, जब ग्रामीण महुआ के एक पेड़ के पास पहुँचे, तो उन्होंने जो देखा वह भयावह था। वहाँ एक बाघ बैठा हुआ था। बाघ के पास ही सुधराम का शव क्षत-विक्षत अवस्था में पड़ा था। शव का सिर और धड़ अलग-अलग पड़े थे और चारों तरफ खून के धब्बे बिखरे हुए थे। ग्रामीणों के अनुसार, बाघ ने मृतक के हाथ और पैर के टुकड़े भी खा लिए थे और बाकी हिस्सा दूर-दूर तक बिखरा पड़ा था।
ग्रामीणों ने बाघ को भगाकर शव को कब्जे में लिया……
बाघ को सामने देखकर ग्रामीण एक पल के लिए सहम गए, लेकिन फिर उन्होंने हिम्मत जुटाई और एक साथ ज़ोर-ज़ोर से शोर मचाना शुरू कर दिया। ग्रामीणों के भारी शोर-शराबे के कारण बाघ वहाँ से भाग गया। इसके बाद ग्रामीण शव के पास पहुँचे और क्षत-विक्षत हिस्सों (सिर और धड़) को इकट्ठा किया। शव के हिस्सों को एक कपड़े में लपेटकर नाव के सहारे वापस गाँव लाया गया, जहाँ पूरा माहौल शोक में डूब गया।
पुलिस और वन विभाग की कार्रवाई……
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और वन विभाग की टीम मौके पर पहुँची। केसला थाना प्रभारी मदन लाल पवार ने बताया कि प्रथम दृष्टया यह हमला बुधवार दोपहर के समय हुआ माना जा रहा है। उन्होंने बताया कि मृतक के सिर का हिस्सा काला पड़ गया था, जो संभवतः तेज गर्मी और धूप के कारण हुआ है। घटनास्थल गाँव से करीब 5-10 किलोमीटर दूर जंगल के भीतर स्थित है। शव को पोस्टमार्टम के लिए सुखतवा अस्पताल भेजा गया और उसके बाद परिजनों को सौंप दिया गया है।
कोर क्षेत्र में प्रवेश: वन विभाग की चिंता और अपील….
वन विभाग के सूत्रों के अनुसार, जहाँ यह दुखद घटना हुई, वह इलाका STR के बफर और कोर क्षेत्र के आसपास का है। फिलहाल यह जाँच की जा रही है कि हमला कोर क्षेत्र के अंदर हुआ या बफर क्षेत्र में। वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि कोर क्षेत्र में बिना अनुमति प्रवेश करना एक दंडनीय अपराध है और बेहद जोखिम भरा भी। इसके बावजूद, महुआ सीजन के दौरान ग्रामीण अक्सर अधिक महुआ इकट्ठा करने के लालच में जोखिम उठाकर जंगल के बहुत अंदर तक चले जाते हैं।
इस घटना के बाद, सतपुड़ा टाइगर रिज़र्व की फील्ड डायरेक्टर राखी नंदा ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा, “महुआ बीनने वालों को पहले से ही चेतावनी दी जा रही है कि वे कोर क्षेत्र में प्रवेश न करें। अगर कोई बफर या टेरिटोरियल क्षेत्र में भी जाता है, तो अकेले न जाए। कम से कम 5-6 लोगों के समूह में रहें और अपने साथ डंडा और टॉर्च ज़रूर रखें। बाघों के इलाके में अकेले जाना जान जोखिम में डालने जैसा है।”
वन विभाग की यह अपील कितनी कारगर साबित होती है, यह तो वक्त बताएगा, लेकिन इस घटना ने जंगली जानवरों के पास रहने वाले ग्रामीणों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

