
नर्मदापुरम / लोक शिक्षण संचनालय भोपाल द्वारा जारी आदेश के तहत लोक सेवकों की सूची मांगी गई है, जिन्होंने टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण नहीं की है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा आदेश जारी किया गया है कि सभी शिक्षकों को जिन्होंने टीईटी परीक्षा पास नहीं की है, उन्हें अनिवार्य रूप से यह परीक्षा देना आवश्यक होगी। परीक्षा में फेल होने या परीक्षा नहीं देने वालों को नौकरी से निकाला जा सकता है। जबकि शिक्षकों का कहना है जब आर टी ई के तहत 2010 में यह नियम बना कि शिक्षकों की टीईटी परीक्षा लेना अनिवार्य है, तो 2010 के बाद जो भी भर्ती हुए है ओर उन्होंने टीईटी की परीक्षा नहीं दी है उनकी परीक्षा लें। परंतु 2010 के पहले नियुक्त शिक्षक 1998,1999, 2001, 2003,2006 आदि वर्षों में नियुक्त हुए उस वक्त शिक्षक बनने के लिए जो अहर्ताएं थी, वह सभी अहर्ताएं पूर्ण करने के बाद ही शिक्षक बने। फिर उन पर टीईटी परीक्षा लागू करना उनके सम्मान को ठेस पहुंचाने का कार्य है। जबकि उस समय टीईटी परीक्षा अनिवार्य ही नहीं थी । अब माननीय सर्वोच्च न्यायालय के अनुसार शिक्षक जो भले ही 2010 के पूर्व नियुक्त हुए हों उन्हें भी टीईटी की परीक्षा देना अनिवार्य है।अध्यापक संयुक्त मोर्चा द्वारा माननीय सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका भी दायर की है । अध्यापक संयुक्त मोर्चा चाहता है। शिक्षकों के प्रति सहानुभूति रखते हुए सरकार स्वयं माननीय सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर करें। अध्यापक संयुक्त मोर्चा ने दिनांक 8 अप्रैल 2026 को 5 बजे पीपल चौक कोठी बाजार पर सभी अध्यापक शिक्षक एकत्रित होकर मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपेंगे।

