

नर्मदापुरम / विद्यार्थियों में सामाजिक एवं मानवीय समझ विकसित करने तथा उनकी बुनियादी शैक्षणिक नींव को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से कक्षा 9वीं के लिए 1 अप्रैल से ब्रिज कोर्स का संचालन प्रारंभ किया जाएगा। यह पहल विद्यार्थियों को न केवल विषयों की गहराई से समझ विकसित करने में सहायक होगी, बल्कि उनमें तार्किक, विश्लेषणात्मक एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण भी विकसित करेगी।
ब्रिज कोर्स के लिए जिले के मास्टर ट्रेनरों को ऑनलाइन प्रशिक्षण 23से 25 मार्च तक प्रदान किया गया। यह प्रशिक्षण लोक शिक्षण संचालनालय, भोपाल की आयुक्त शिल्पा गुप्ता के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ। इस अवसर पर सम्मिलित हुए अपर संचालक डॉ. मनीष वर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि एनसीईआरटी की पुस्तकों का मूल उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल रटाना नहीं, बल्कि उनमें सीखने की वास्तविक प्रवृत्ति विकसित करना है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि आज की शिक्षा पद्धति में रटने की प्रवृत्ति को समाप्त कर जिज्ञासा, समझ और विश्लेषण की क्षमता को बढ़ावा देना अत्यंत आवश्यक है। ब्रिज कोर्स इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है, जो विद्यार्थियों को “क्या पढ़ना है” से आगे बढ़ाकर “क्यों और कैसे समझना है” की ओर प्रेरित करता है। इसके माध्यम से विद्यार्थी विषयों को केवल याद करने के बजाय उन्हें गहराई से समझेंगे, उनके कारणों को जानेंगे और उन्हें अपने जीवन से जोड़ पाएंगे।
डॉ. वर्मा ने यह भी बताया कि जब छात्र स्वयं प्रश्न पूछते हैं, चर्चा करते हैं और गतिविधियों के माध्यम से सीखते हैं, तब उनमें आत्मविश्वास के साथ-साथ स्थायी ज्ञान का निर्माण होता है। यही प्रक्रिया उन्हें केवल परीक्षा के लिए नहीं, बल्कि जीवन के लिए सीखने की दिशा में अग्रसर करती है।
कोर्स के प्रमुख उद्देश्य……
इस ब्रिज कोर्स का मुख्य लक्ष्य विद्यार्थियों के सीखने में आई कमियों (लर्निंग गैप) को दूर कर उन्हें एक मजबूत आधार प्रदान करना है। कक्षा 6 से 8 तक की मूल अवधारणाओं को पुनः दोहराकर कक्षा 9 के विद्यार्थियों की नींव को सुदृढ़ किया जाएगा।
गतिविधि-आधारित शिक्षण के माध्यम से रचनात्मकता और नवाचार को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे जटिल विषय भी सरल और समझने योग्य बन सकें।
शिक्षण पद्धति में नवाचार…..
इस कोर्स में शिक्षक केवल पढ़ाने वाले नहीं, बल्कि मार्गदर्शक की भूमिका निभाएंगे।
चर्चा, वाद-विवाद, भूमिका-निर्वाह और परियोजना कार्य जैसी विधियों के माध्यम से विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। इससे शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया अधिक जीवंत, रोचक और प्रभावी बनेगी।
मूल्यांकन की स्पष्ट रूपरेखा……
ब्रिज कोर्स के अंतर्गत तीन चरणों में मूल्यांकन किया जाएगा—
बेसलाइन टेस्ट: 1 अप्रैल से विद्यालय खुलते ही……
मिडलाइन टेस्ट: 28 से 30 जून (ग्रीष्मावकाश के बाद)
एंडलाइन टेस्ट: 20 जुलाई…..
इन परीक्षणों के प्राप्त अंकों का 50% अधिभार त्रैमासिक परीक्षा में जोड़ा जाएगा। सभी परिणामों की प्रविष्टि विमर्श पोर्टल पर की जाएगी।
प्राचार्य की अहम भूमिका…..
इस कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन में प्राचार्य की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी गई है। वे विद्यालय में विषयवार शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करते हुए कोर्स का नियमित संचालन कराएंगे।
साथ ही, विद्यार्थियों की कॉपियों की नियमित जांच, प्रगति पर हस्ताक्षर एवं सतत निगरानी के माध्यम से गुणवत्ता सुनिश्चित की जाएगी।
सतत मॉनिटरिंग व्यवस्था…….
जिला शिक्षा अधिकारी एवं अन्य प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा ब्रिज कोर्स की नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी।
ऑनलाइन एवं ऑफलाइन माध्यम से विद्यालयों का निरीक्षण कर शिक्षण कार्य, उपस्थिति, अध्ययन सामग्री एवं विद्यार्थियों की प्रगति की समीक्षा की जाएगी।
शिक्षा में नया आयाम……
यह अभ्यास-केंद्रित पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को सरल उदाहरणों और पर्याप्त अभ्यास के माध्यम से विषयों को समझने में मदद करेगा।
इस वर्ष विशेष रूप से सामाजिक विज्ञान, संस्कृत और विज्ञान को भी ब्रिज कोर्स में शामिल किया गया है। पहले यह कोर्स केवल हिंदी, गणित और अंग्रेजी तक सीमित था, लेकिन अब सभी छह विषयों को शामिल कर इसे और व्यापक बनाया गया है।
यह पहल न केवल रटने की प्रवृत्ति को समाप्त कर सीखने की संस्कृति को विकसित करेगी, बल्कि विद्यार्थियों को आत्मविश्वासी, जिज्ञासु और समझदार बनाते हुए उनकी सफलता का मार्ग भी प्रशस्त करेगी।

