
नर्मदापुरम / सुप्रतिष्ठित व्यंग्यकार रहे स्व. इंद्रकुमालवीय की स्मृति में होली पर्व पर चतुर्थ वर्ष में आयोजित रंगारंग कविसम्मेलन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। विवेकानंद युवा मण्डल के प्रांत अध्यक्ष प्रसन्न हर्णे के मुख्य आतिथ्य, पार्षद द्वव नरेंद्र पटेल और रेखा यादव के विशेष आतिथ्य और नर्मदापुरम आव्हान समिति के संयोजक कैप्टन किशोर करैया की अध्यक्षता में आयोजित इस गरिमामय कवि सम्मेलन का संचालन पूर्व जिला शिक्षा अधिकारू एवं राष्ट्रीय कवि ब्रजकिशोर पटेल द्वारा किया गया। कवि सम्मेलन का आरंभ कवयित्री मंगला चरण की सरस्वती वंदना से हुआ। दूसरे क्रम पर नर्मदाप्रसाद हरियाले ने भावपूर्ण गीतों से महफ़िल में रंग जमा दिया।
“मैं दशरथ मेरा अति व्याकुल है मन।
राम से कह दो कैकेयी कि न जायें वन ।”
तीसरे क्रम सुनील सांवला ने आल्हा धुन से शमां बांध दिया।
” मां नर्मदा के तट पर जन्नत का नजारा। ”
पथरौटा के शायर सतीश शमी ने अपने पुर असर अंदाज में कहा–
” हमको बिगड़ी हुई तकदीर गर बनानी है।
मां के चरणों पे सिर झुकानी है। ”
वाह वाह फेम संदीप मदन गुरू ने अपने निराले अंदाज में खूब हंसकर पिता के लिये कहा–
छू सकें हम आसमां इसके लिए
पिता खुद को पल पल गिराता रहा।
हास्य कवि दिनेश भोपाली ने भी खूब ठहाके लगवाये। और कहा-
“तवायफ कैद से खुद को
छुडा लेती तो अच्छा था। ”
कवयित्री मंगलाकेवट ने श्रंगार के साथ-साथ संवेदनशील गीत पढकर खूब वाह वाही लूटी।
ओज कवि विजय बारूद ने भगतसिंह को फांसी देने बाली रस्सी के मन का दर्द बताया।
गीतकार अमित बिल्लौरे ने गीत के माध्यम से कविसम्मेलन को ऊंचाई दी।
संचालक ब्रजकिशोर पटेल ने जहां अपने चुटीले अंदाज में सबको हंसाया बेटियों के लिये कहा-
” सायकल पर भी कल तक जो चढ न सकी।
आसमानों में ऊंची उडी बेटियाँ। ”
आजाद वतन वर्मा ने शिखर कलश रखते हुए देशभक्ति गीत पर भारत-जिंदाबाद के नारे लगवा दिये। अंत में रामेश्वर यादव ने अपनी आशु कविता के माध्यम से आभार प्रकट किया।

