
नर्मदापुरम / जिला प्रशासन की नाक के नीचे सरकारी राशन की कालाबाजारी का खेल थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला वार्ड क्रमांक 33 की राशन दुकान (क्रमांक 2601098) से जुड़ा है, जहां पूर्व में हुए 2.25 लाख रुपये के गबन के बावजूद न तो कोई वसूली की गई और न ही दोषी पर FIR दर्ज हुई। हद तो तब हो गई जब इसी दागी संचालक को वार्ड क्रमांक 20-29 की दुकान (क्रमांक 2601062) का प्रभार सौंप दिया गया।
जांच में खुली पोल 37 क्विंटल राशन कम मिला…….
बुधवार को कलेक्टर के विशेष निर्देश पर खाद्य विभाग की टीम ने जब वार्ड 20-29 स्थित दुकान पर औचक दबिश दी, तो स्टॉक रजिस्टर और गोदाम के रिकॉर्ड में भारी अंतर पाया गया। मौके पर की गई भौतिक जांच में लगभग 37 क्विंटल गेहूं कम पाया गया। राशन की यह कमी सीधे तौर पर गरीबों के हक पर डाका डालने और इसे बाजार में ऊंचे दामों पर बेचने की ओर इशारा करती है।
अधिकारियों की मिलीभगत पर उठ रहे सवाल……
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि दुकान संचालक पिछले कई वर्षों से इस तरह की अनियमितताएं कर रहा है। लगभग दो साल पहले उजागर हुए सवा दो लाख रुपये के घोटाले को ठंडे बस्ते में डाल देना, स्थानीय खाद्य अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। सवाल यह है कि…….
आखिर किसके संरक्षण में बिना रिकवरी किए संचालक को दूसरी दुकान का जिम्मा दिया गया?
गंभीर वित्तीय अनियमितता के बावजूद अब तक पुलिस केस दर्ज क्यों नहीं किया गया?
कलेक्टर की सख्त कार्रवाई का इंतजार……
दुकान के “सल्लानीकरण” (मर्ज करने) के बाद भी भ्रष्टाचार का सिलसिला जारी रहने से आम जनता में भारी आक्रोश है। हालांकि, इस बार स्वयं कलेक्टर के संज्ञान लेने के बाद जांच की गई है, जिससे उम्मीद बंधी है कि अब केवल नोटिस तक सीमित न रहकर, कठोर कानूनी कार्रवाई और रिकवरी की जाएगी। प्रशासनिक रुख जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को सौंप दी है। अब देखना यह होगा कि क्या प्रशासन इस बार “अन्न माफिया” पर नकेल कसता है या पुरानी फाइलों की तरह यह मामला भी रफा-दफा कर दिया जाएगा।

