
इटारसी / तहसील कार्यालय में शुक्रवार को उस वक्त गहमागहमी बढ़ गई जब बड़ी संख्या में कोटवार अपनी मांगों को लेकर लामबंद हो गए।कोटवार संघ ने शासन द्वारा प्रदाय की जा रही वर्दी और सामग्री की निम्न गुणवत्ता पर कड़ा आक्रोश जताया है। कोटवारों का आरोप है कि ठेकेदार द्वारा दी जा रही वर्दी पहनने योग्य नहीं है, जो सीधे तौर पर सरकारी धन का दुरुपयोग है। इस संबंध में कोटवार संघ ने मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन तहसीलदार को सौंपा। ज्ञापन में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे इस घटिया सामग्री को स्वीकार नहीं करेंगे।
प्रमुख मांगें: ‘कमीशनखोरी’ के बजाय ‘सीधा भुगतान’…
कोटवारों ने अपनी मांगों को बेहद मुखर ढंग से रखा है:…
DBT से हो भुगतान: कोटवारों का कहना है कि वर्दी की राशि किसी ठेकेदार को देने के बजाय सीधे उनके बैंक खातों (Direct Benefit Transfer) में भेजी जाए। इससे वे अपनी माप और पसंद के अनुसार अच्छी गुणवत्ता की वर्दी सिलवा सकेंगे।
दबाव पर रोक: आरोप है कि प्रशासन द्वारा कोटवारों पर घटिया सामग्री लेने के लिए दबाव बनाया जा रहा है, जिसे तुरंत रोका जाए।
सहायता कोष में जाए पैसा: संघ ने एक अनोखा प्रस्ताव रखा है कि यदि तकनीकी कारणों से राशि खातों में नहीं डाली जा सकती, तो यह पैसा किसी ठेकेदार को देने के बजाय ‘मुख्यमंत्री सहायता कोष’ में जमा कर दिया जाए, ताकि वह जनहित में काम आए।
”हम स्वाभिमान से समझौता नहीं करेंगे। ठेकेदार द्वारा दी जा रही सामग्री इतनी घटिया है कि उसे पहनना मुश्किल है। शासन को चाहिए कि भ्रष्ट व्यवस्था को बढ़ावा देने के बजाय राशि सीधे कोटवारों को दे।”
जांच की मांग, भुगतान रोकने की अपील…..
ज्ञापन के माध्यम से कोटवारों ने मांग की है कि संबंधित ठेकेदार को किए जाने वाले भुगतान पर तत्काल रोक लगाई जाए और घटिया सामग्री की आपूर्ति करने वाले ठेकेदार की निष्पक्ष जांच कर कड़ी कार्रवाई की जाए।
ज्ञापन सौंपते समय जिला अध्यक्ष पंकज मेहरा के नेतृत्व में तहसील अध्यक्ष श्याम सिंह मेहरा, उपाध्यक्ष कमलकिशोर, सचिव सुषमा सिंह हिनोतिया सहित इटारसी तहसील के समस्त कोटवार बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

