नर्मदापुरम / गुरु–शिष्य परंपरा के अंतर्गत शास्त्रीय संगीत की विधिवत शिक्षा प्राप्त कर रहे नवोदित कलाकारों के समूह “नीवा” द्वारा “जीवन रेखा रेवा” शीर्षक से माँ नर्मदा के पाँच भजनों को श्रद्धा एवं भक्ति भाव के साथ माँ नर्मदा के चरणों में समर्पित किया गया है। यह भजन-श्रृंखला केवल संगीत प्रस्तुति ही नहीं, बल्कि माँ नर्मदा के प्रति समर्पण, साधना और सृजनात्मक साधक भाव का सशक्त उदाहरण है।नर्मदा भजनों की इस विशेष श्रृंखला में सम्मिलित पाँचों भजनों का लेखन, संगीत निर्देशन, गायन, रिकॉर्डिंग तथा फिल्मांकन का समस्त कार्य स्वयं इन युवा कलाकारों द्वारा किया गया है, जो उनकी बहुआयामी प्रतिभा, अनुशासन और संगीत साधना का परिचायक है। शास्त्रीय संगीत की परंपरागत समझ को आधुनिक तकनीकी दक्षता के साथ प्रस्तुत करते हुए “नीवा” ने एक सराहनीय और प्रेरणादायक प्रयास किया है। “नीवा” समूह के संस्थापकों में आदित्य परसाई, ऋत्विक राजपूत, चित्रांश अग्रवाल, प्रसंग तोमर, विशाल सगर, विपुल दुबे, सक्षम पाठक, यश मालवीय एवं निकुंज सैनी सम्मिलित हैं, जिन्होंने सामूहिक सृजन के माध्यम से इस प्रोजेक्ट को आकार दिया। सहयोगी कलाकारों के रूप में बैंजो वादक दिलशाद अली एवं ऑक्टोपेड वादक ज्ञान वैष्णव ने अपने वादन से भजनों को विशेष संगीतात्मक ऊँचाई प्रदान की है। “नीवा” की इस उत्कृष्ट एवं नवाचारी उपलब्धि पर अरुण शर्मा, अशोक जमनानी, वैभव शर्मा, पंडित रामसेवक शर्मा, विजय परसाई, राम परसाई, लखन दुबे, आनंद नामदेव सहित अनेक ख्यातिप्राप्त संगीतकारों, गीतकारों एवं साहित्यकारों ने मुक्त कंठ से प्रशंसा करते हुए हार्दिक शुभकामनाएँ व्यक्त की हैं। निस्संदेह “जीवन रेखा रेवा” परियोजना नवोदित कलाकारों की साधना, समर्पण और सांस्कृतिक चेतना का जीवंत प्रतीक है, जो गुरु-शिष्य परंपरा की गरिमा को बनाए रखते हुए भारतीय संगीत की समृद्ध विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही है।

