
नर्मदापुरम / माघ मास की पावन ‘गुप्त नवरात्रि’ के चतुर्थ दिवस पर आज देशभर के शक्तिपीठों और साधना केंद्रों में दस महाविद्याओं में चतुर्थ स्थान रखने वाली माँ भुवनेश्वरी की विशेष अर्चना की जा रही है। गुप्त साधना के लिए समर्पित इन दिनों में माँ भुवनेश्वरी की पूजा को भौतिक और आध्यात्मिक उन्नति के लिए सर्वोत्तम माना गया है।
*सृष्टि की आधारशिला हैं माँ भुवनेश्वरी*
विख्यात ज्योतिषाचार्य पं. यश उपाध्याय के अनुसार, माँ भुवनेश्वरी केवल एक देवी नहीं, बल्कि संपूर्ण ब्रह्मांड की संचालिका और ‘मूल प्रकृति’ हैं। वे आकाश तत्व का प्रतिनिधित्व करती हैं और चराचर जगत को अपने भीतर धारण करती हैं। शास्त्र कहते हैं कि माँ के संकल्प मात्र से ही सृष्टि का सृजन, पालन और संहार संभव होता है।
*साधना से सिद्ध होते हैं मनोरथ*
पंडित जी बताते हैं कि जो साधक गुप्त नवरात्रि की इस विशेष तिथि पर माँ की शरण में जाता है, उसे निम्नलिखित दिव्य फलों की प्राप्ति होती है:
* राजसी सुख और ऐश्वर्य: माँ की कृपा से साधक को भूमि, भवन, वाहन और अपार धन-संपदा का सुख प्राप्त होता है।
* आत्मिक बल: यह साधना आत्मविश्वास को उस ऊँचाई पर ले जाती है जहाँ साधक कठिन से कठिन बाधाओं को सहजता से पार कर लेता है।
* नकारात्मकता का नाश: शत्रुओं के दमन और बुरी शक्तियों से सुरक्षा के लिए माँ भुवनेश्वरी को एक अभेद्य कवच माना गया है।
* मानसिक शांति: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में यह साधना मानसिक विकारों को दूर कर आत्मिक स्थिरता और शांति प्रदान करने वाली है।
गुप्त नवरात्रि का विशेष महत्व…..
सामान्य नवरात्रि की तुलना में गुप्त नवरात्रि में साधना का प्रभाव कई गुना अधिक होता है। पं. उपाध्याय के अनुसार, इन दिनों में की गई ‘सात्विक साधना’ साधक को आत्म-साक्षात्कार की ओर ले जाती है। माँ का सौम्य स्वरूप भक्तों के लिए कल्याणकारी है और उनकी भक्ति से जीवन के सभी अभावों का अंत होता है।

