
नर्मदापुरम / महिला बाल विकास विभाग के सहायक संचालक पर बिना सक्षम अधिकारी के आउटसोर्स कर्मचारी ने केस दर्ज कराया। बताया जाता है कि जिला कार्यक्रम अधिकारी ने भी आउटसोर्स महिला कर्मचारी को लापरवाही के चलते कई बार नोटिस भी दिया था। लेकिन काम के प्रति उनमें कोई सुधार नहीं हो रहा था। बिना कलेक्टर और सक्षम अधिकारी के मामला दर्ज नहीं होता है। जो महिला काम कर रही है वह आउटसोर्स कर्मचारी है । आउटसोर्स कर्मचारी का एक साल का कांटेक्ट रहता है। अधिकारी के कहने से कांटेक्ट में बढ़ जाता है। महिला बाल विकास विभाग की सहायक संचालक संजय जैन ने केवल नोटिस दिया था ।
महिला बाल विकास विभाग के सहायक संचालक पर दर्ज कराया झूठा केस….
सहायक संचालक श्री जैन की झूठी शिकायत की है। अधिकारी को अभी जिले में 6 साल 5 महीने हो गए हैं । नर्मदापुरम में शिकायतकर्ता श्रीमति रत्ना चौधरी आउटसोर्स कर्मचारी महिला एवं बाल विकास विभाग नर्मदापुरम में सहायक जिला समन्वयक के पद पर कार्यरत हैं। श्रीमति चौधरी अपने कर्तव्य के प्रति हमेशा से ही लापरवाह रही हैं। इसी कारण ललित डेहरिया जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग नर्मदापुरम द्वारा कर्तव्य के प्रति लापरवाही देर से आने और अनुपस्थित रहने के कारण 13 नवंबर 2024, 25 फरवरी 2025, 22 सितंबर 2025 एवं 15 अक्टूबर 2025 को संजय कुमार जैन सहायक संचालक द्वारा नोटिस दिए गये और 18 दिसंबर 2025 को आयुक्त को जिला कार्यक्रम अधिकारी द्वारा पत्र लिखकर श्रीमति चौधरी की स्थान पर किसी अन्य की नियुक्ति के लिए आग्रह किया गया था। इसके उपरांत भी श्रीमति चौधरी ने अपने कर्तव्य को गंभीरता से नहीं लिया।
*आउटसोर्स एजेंसी को भी अन्य की नियुक्ति के लिए लिखा था पत्र*
सहायक संचालक संजय कुमार द्वारा 22 दिसंबर 2025 और 18 दिसंबर 2025 के जिला कार्यक्रम अधिकारी द्वारा आयुक्त को लिखे पत्र के संदर्भ में आउट सोर्स कंपनी टी एंड एम को किसी अन्य की नियुक्ति के लिए लिखा एवं 2 जनवरी 2026 को वीसी में अनुपस्थित रहने के कारण आउटसोर्स एजेंसी को लिखा गया था कि श्रीमति रत्ना अपने ऊपर होने वाली कार्यवाही से बचने हेतु सहायक संचालक संजय कुमार जैन की झूठी शिकायत महिला थाने में कर दी ताकि संबंधित अधिकारी की प्रतिष्ठा की हानि हो और सबका ध्यान उनकी गलतियों से हट जाए, ताकि वे अपनी मनमर्जी से काम कर सकें।
*केस दर्ज कराने कंट्रोलिंग अधिकारी की स्वीकृति आवश्यक*
माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के परिपालन में शासकीय कर्मचारी पर एफआईआर दर्ज करने के लिए नियोक्ता अथवा कंट्रोलिंग ऑफिसर की स्वीकृति आवश्यक है परंतु यह एफ आई आर बिना सक्षम स्वीकृति के कर दी गई है। मामले को पुलिस ने जांच में लिया है, अब देखना होगा की सच्चाई क्या है।

