

इटारसी / नगर पालिका इटारसी में कार्यरत सफाई कर्मचारियों को समय पर वेतन न मिलना, PF/EPF की राशि जमा न होना तथा कलेक्टर द्वारा निर्धारित दरों के अनुरूप भुगतान न किया जाना अब केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि एक गंभीर श्रमिक, सामाजिक एवं मानवाधिकार से जुड़ा मुद्दा बन चुका है। इसी विषय को लेकर आज सफाई कर्मचारियों ने एकजुट होकर प्रशासन के समक्ष अपनी पीड़ा, आक्रोश एवं मांगों को स्पष्ट रूप से रखा। मध्य प्रदेश शासन द्वारा स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं कि सफाई कर्मचारियों को प्रत्येक माह की 5 तारीख तक वेतन भुगतान सुनिश्चित किया जाए, इसके बावजूद इटारसी में सफाई कर्मचारियों को हर माह वेतन के लिए अनिश्चितता एवं देरी का सामना करना पड़ रहा है। पहले से ही मात्र ₹8,000 से ₹10,000 के सीमित वेतन पर कार्य कर रहे कर्मचारियों के लिए यह स्थिति आर्थिक, मानसिक एवं पारिवारिक स्तर पर अत्यंत पीड़ादायक है। मध्य प्रदेश सफाई मजदूर संघ के प्रांतीय अध्यक्ष महेश आर्य के नेतृत्व में सफाई कर्मचारियों ने आज SDM को ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया कि कर्मचारियों को कलेक्टर दर के अनुसार वेतन नहीं दिया जा रहा है, जो श्रम कानूनों का प्रत्यक्ष उल्लंघन है। साथ ही PF/EPF की राशि या तो जमा नहीं की जा रही है अथवा कर्मचारियों को इसकी कोई पारदर्शी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। ज्ञापन में यह भी अवगत कराया गया कि ‘चुंगी छट्टी’ मद की राशि 30 दिसंबर को नगर पालिका को प्राप्त हो चुकी थी, इसके बावजूद आज दिनांक तक सफाई कर्मचारियों का वेतन भुगतान नहीं किया गया है। इसी प्रकार, कलेक्टर एरियर्स के संबंध में मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) द्वारा दीपावाली से पूर्व भुगतान किए जाने का आश्वासन दिया गया था, किंतु वह आश्वासन आज दिनांक तक पूरा नहीं हुआ है।
ठेकेदारी व्यवस्था के अंतर्गत नगर पालिका प्रशासन एवं संबंधित ठेकेदार एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते प्रतीत हो रहे हैं, जबकि इस प्रशासनिक उदासीनता और टालमटोल का सीधा, गंभीर एवं अन्यायपूर्ण दुष्प्रभाव सफाई कर्मचारियों पर पड़ रहा है। इस अवसर पर महेश आर्य ने स्पष्ट शब्दों में कहा – “ठेकेदारी व्यवस्था में भी नगर पालिका ही Principal Employer होती है। ऐसे में कर्मचारियों के वेतन, PF/EPF एवं सामाजिक सुरक्षा की अंतिम जिम्मेदारी नगर पालिका प्रशासन की ही है। श्रमिकों के अधिकारों की अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जा सकती।” उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि 26 जनवरी 2026 तक लंबित वेतन, कलेक्टर एरियर्स तथा PF/EPF का भुगतान सुनिश्चित नहीं किया गया, तो 26 जनवरी के बाद सफाई कर्मचारी आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।आंदोलन की स्थिति में यदि नगर की सफाई व्यवस्था प्रभावित होती है, तो इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी नगर पालिका प्रशासन की होगी। ज्ञापन सौंपने के पश्चात कर्मचारियों ने नगर पालिका कार्यालय में भी अपनी बात रखने का प्रयास किया, किंतु CMO सहित अन्य जिम्मेदार अधिकारी कार्यालय में उपस्थित नहीं मिले, जिससे कर्मचारियों में रोष एवं निराशा और अधिक बढ़ गई। यह स्पष्ट रूप से श्रमिकों की मानवीय गरिमा, संवैधानिक अधिकारों एवं न्याय की लड़ाई है। सफाई कर्मचारी शहर की स्वच्छता एवं जनस्वास्थ्य की आधारशिला हैं, किंतु यदि उन्हीं के अधिकारों की निरंतर अनदेखी की जाती रही, तो यह पूरे समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय होगा। अब समस्त नगरवासियों एवं सफाई कर्मचारियों की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। इस अवसर पर मध्य प्रदेश सफाई मजदूर संघ के प्रांतीय अध्यक्ष महेश आर्य ने तीखे राजनीतिक शब्दों में कहा—
“नगर पालिका इटारसी में आज जो हो रहा है, वह प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि सत्ता की संवेदनहीनता का परिणाम है। 30 दिसंबर को ‘चुंगी छट्टी’ की राशि आ जाने के बावजूद आज तक सफाई कर्मचारियों का वेतन न देना इस बात का प्रमाण है कि इस व्यवस्था में गरीब और श्रमिक सबसे आख़िरी पायदान पर हैं।
दीपावली से पहले कलेक्टर एरियर्स देने का आश्वासन देना और फिर महीनों तक उसे टालते रहना, कर्मचारियों के साथ खुला धोखा है।
ठेकेदार और नगर पालिका एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं, लेकिन सत्ता में बैठे लोग यह भूल गए हैं कि कानून के अनुसार नगर पालिका ही Principal Employer है और अंतिम जवाबदेही उसी की है। यह केवल वेतन का सवाल नहीं है, यह सम्मान, अधिकार और संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गरिमापूर्ण जीवन का प्रश्न है। अगर 26 जनवरी 2026 तक सभी लंबित भुगतान नहीं किए गए, तो यह लड़ाई सड़क से सदन तक जाएगी, और इसके परिणामों की पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।”

