

नर्मदापुरम / व्यावसायिक गलियारों में उस वक्त सनसनी फैल गई, जब जीएसटी विभाग के प्रवर्तन दस्ते ने शहर के रसूखदार गिल्ला परिवार के ठिकानों पर अपनी अब तक की सबसे बड़ी दबिश दी। मोरछली चौक स्थित उनके रिहायशी और व्यापारिक परिसरों को छावनी में तब्दील कर विभाग ने ‘टैक्स चोरी’ के खिलाफ एक निर्णायक युद्ध का बिगुल फूंक दिया है। मंगलवार का दिन गिल्ला परिवार के लिए किसी भूचाल से कम नहीं था। विभाग की विशेष टीम ने इतनी गोपनीयता बरती कि स्थानीय पुलिस बल के जुटने तक किसी को खबर नहीं थी कि निशाना कौन है। दोपहर से शुरू हुई यह कार्रवाई देर शाम तक चलती रही। टीम ने प्रभात और प्रदीप गिल्ला के घर और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को चारों तरफ से सील कर दिया। हार्ड डिस्क, लैपटॉप और मोबाइल डेटा को कब्जे में लेकर फॉरेन्सिक जांच के लिए भेजा गया है।
*खजाने और काली कमाई का ‘कच्चा चिट्ठा’*
अधिकारियों को जांच के दौरान केवल कागजी हेरफेर ही नहीं मिला, बल्कि अघोषित संपत्ति का एक विशाल भंडार भी हाथ लगा है। प्राथमिक सूत्रों के मुताबिक घर के गुप्त ठिकानों से भारी मात्रा में ज्वैलरी बरामद हुई। शहर और आसपास के इलाकों में खरीदे गए प्लॉट और इंडस्ट्रियल प्लांट के दस्तावेज मिले हैं, जो ‘बेनामी संपत्ति’ की ओर इशारा कर रहे हैं। परिवार के बैंक लॉकरों को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया गया है, जिनसे और भी बड़े राज खुलने की उम्मीद है।
*रडार पर ‘लोहा’ कारोबार, करोड़ों के घोटाले की आशंका*
गिल्ला परिवार का मुख्य व्यवसाय लोहा है। जांच में यह बात सामने आई है कि स्टॉक रजिस्टर और वास्तविक माल के बीच जमीन- आसमान का अंतर है। कच्चे बिलों के जरिए करोड़ों रुपये का लेन-देन जीएसटी पोर्टल से छिपाया गया, जिससे सरकारी खजाने को भारी चपत लगी है। यह कार्रवाई केवल एक चेतावनी नहीं, बल्कि उन सभी के लिए संदेश है जो व्यापार की आड़ में कर चोरी का सिंडिकेट चला रहे हैं। जब्त किए गए दस्तावेजों का मिलान किया जा रहा है और पेनाल्टी के साथ बड़ी कानूनी कार्रवाई तय है।
*व्यापारियों में दहशत*
नर्मदापुरम के मोरछली चौक से शुरू हुई यह धमक अब जिले के हर छोटे-बड़े कारोबारी तक पहुँच चुकी है। बाजार में चर्चा है कि विभाग के पास कई और बड़े नामों की सूची है। गिल्ला परिवार पर हुई यह ‘स्ट्राइक’ आने वाले दिनों में कई और रसूखदारों की नींद उड़ाने वाली है।

