
नर्मदापुरम / श्री राम मंदिर ग्राम दतवासा तहसील डोलरिया में चल रही श्री शिव महापुराण में डॉ. पुष्कर परसाई ने शिव-पार्वती विदाई की कथा का वर्णन किया। आचार्य श्री ने कहा कि जब माता पार्वती मायके से ससुराल चली तो स्वयं ब्राह्मण ने पार्वती को स्त्री धर्म बताया। उन्होंने कहा कि साध्वी स्त्री का यह धर्म है कि वह मन, वचन और कर्म से पति की परायण रह कर उसकी सेवा करे। उन्होंने बताया कि संसार के अंदर तीन प्रकार के अधिकार हैं। जन्म सिद्ध, कर्म सिद्ध और धर्म सिद्ध अधिकार। धर्म सिद्ध अधिकार पत्नी को प्राप्त होता है। इसके आधार पर पत्नी का कर्तव्य है कि वह अपने ससुराल के कुल मर्यादा रखते हुए हर्षोल्लास पूर्वक जीवन व्यतीत करे। आचार्य श्री ने कहा कृतिकाओं के घर से जब गणों के साथ कार्तिकेय कैलाश पहुंचे तो वहां पर माता पार्वती व शंकर जी सहित समस्त देवियों एवं देवगणों ने अपने-अपने अस्त्र- शस्त्र प्रदान कर देवताओं के सेनापति पद पर सुशोभित किया। तब शंकर जी ने प्रसन्नता से देवताओं से कहा कि वरदान मांगो। समस्त देवताओं ने कुमार द्वारा तारकासुर वध की अपनी शक्ति के प्रहार से महाबली तारकासुर का वध करके संसार को निर्भय किया। आचार्य श्री ने कहा कि शिव महापुराण की कथाओं में भगवान श्री गणेश के जन्म की कथा अत्यंत रोचक, भावनात्मक और आध्यात्मिक है। यह कथा न केवल भगवान गणेश की उत्पत्ति को दर्शाती है, बल्कि माता पार्वती की शक्ति, भक्ति और सृजनात्मकता का भी प्रतीक है। उन्होंने कथा प्रसंग पर विस्तार से बताया कि शिव महापुराण के अनुसार, एक बार माता पार्वती स्नान के लिए जा रही थीं। उन्होंने अपने उबटन (चंदन और हल्दी के लेप) से एक सुंदर बालक की मूर्ति बनाई और उसमें प्राण डाल दिए। वह बालक कोई और नहीं बल्कि भगवान गणेश ही थे। पार्वती ने गणेश को आदेश दिया कि जब तक वह स्नान करके न लौटें, तब तक वह किसी को भी अंदर न आने दे। उसी समय भगवान शिव वहां पहुंचे, लेकिन गणेश जी ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया। यह देखकर शिव क्रोधित हो उठे और अपने त्रिशूल से गणेश का मस्तक काट दिया।जब माता पार्वती बाहर आईं और यह दृश्य देखा, तो वे अत्यंत दुखी और क्रोधित हो गईं। उन्होंने पूरे सृष्टि को नष्ट करने की धमकी दी। तब भगवान शिव ने ब्रह्मा, विष्णु आदि देवताओं के साथ मिलकर एक उपाय निकाला। शिव जी ने एक हाथी का सिर काटकर गणेश के शरीर पर स्थापित किया और उन्हें जीवनदान दिया।भगवान शिव ने श्री गणेश को आशीर्वाद दिया कि किसी भी पूजा या कार्य की शुरुआत श्री गणेश के बिना नहीं होगी। यह कथा माता-पिता की कृपा, भक्तिभाव और यह सिखाती है कि बाधाएं चाहे कितनी भी आएं, वे विघ्नहर्ता श्री गणेश के आशीर्वाद से दूर हो सकती हैं। शिव महापुराण कथा में भगवान शंकर की आरती के पश्चात प्रसाद का वितरण किया गया इस दौरान दर्जनों श्रद्धालु मौजूद रहे।कथा का समय 1:30 बजे से 4:30 तक। आयोजक रिछारिया परिवार ने सभी से कथा में पधारने का आग्रह किया।

