
नर्मदापुरम / जिले से एक बेहद सनसनीखेज और विचलित करने वाला मामला सामने आया है। शहर के आई टी आई स्थित एक प्रतिष्ठित हायर सेकेंडरी स्कूल की एक छात्रा ने मौत को गले लगा लिया है। इस घटना ने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया है और निजी स्कूलों में बच्चों की मानसिक सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्रा ने कमरे में वेंटिलेटर की रोड से फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। पुलिस ने मर्ग कायम कर पोस्ट मार्टम करा कर शव परिजनों को सौंप दिया। बताया जाता है कि पेरेंट्स मीटिंग में कम नंबर आने को लेकर चर्चा हुई थी जिससे छात्रा मानसिक रूप से परेशान हो गई थी।
*पैरेट्स मीटिंग्स के नाम पर ‘मानसिक टॉर्चर’ का आरोप*
प्राप्त जानकारी के अनुसार मृत छात्रा के परिजनों ने स्कूल प्रशासन पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। बताया जा रहा है कि पैरेंट्स-टीचर मीटिंग के दौरान बच्चियों को न केवल मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था, बल्कि उन्हें शारीरिक और मनोवैज्ञानिक रूप से भी अपमानित किया जाता था। मृत छात्रा की मां महिला एवं बाल विकास विभाग में सुपरवाइजर के पद पर कार्यरत हैं, जिन्होंने स्कूल के भीतर चल रहे इस उत्पीड़न के तंत्र को उजागर किया है।
*विवादों और घोटालों का पुराना गढ़ रहा है स्कूल का*
यह कोई पहला मामला नहीं है जब यह स्कूल सुर्खियों में आया हो। इस संस्थान का इतिहास विवादों से भरा रहा है। पूर्व में अनियमितताओं के चलते शासन स्तर पर इस स्कूल की मान्यता रद्द करने की कार्रवाई की जा चुकी है। जिला प्रशासन ने फीस वसूली के अवैध नियमों और अभिभावकों के शोषण के मामले में स्कूल पर लाखों रुपए का भारी जुर्माना भी लगाया था। स्कूल के भीतर बच्चों को डराने-धमकाने और अनुचित दबाव बनाने की शिकायतें लंबे समय से जिला शिक्षा विभाग को मिल रही थीं, लेकिन ठोस कार्रवाई के अभाव ने आज मासूम की जान ले ली। घटना के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और वे न्याय की गुहार लगा रहे हैं। क्षेत्र के नागरिकों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि बार-बार नियमों को ताक पर रखने वाले इस स्कूल को आखिर किसके संरक्षण में चलाया जा रहा है। स्थानीय सामाजिक संगठनों और अभिभावकों ने मुख्यमंत्री और स्कूल शिक्षा मंत्री से मांग की है कि दोषी स्कूल प्रबंधन और शिक्षकों के खिलाफ धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) के तहत मामला दर्ज हो। स्कूल की मान्यता को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर इसे पूरी तरह सील किया जाए। पूरे मामले की न्यायिक जांच हो ताकि भविष्य में कोई अन्य बच्चा इस ‘शिक्षा के व्यापार’ की बलि न चढ़े। आईटीआई स्थित स्कूल यह घटना एक चेतावनी है कि शिक्षा संस्थानों को केवल अंकों की रेस और फीस वसूली का केंद्र न बनाकर बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जवाबदेह बनाया जाए। गौरतलब है कि स्कूल की अनियमितता को लेकर कई संगठनों ने भी आंदोलन कर चेतावनी दी थी।

