
नर्मदापुरम / श्री राम मंदिर ग्राम दतवासा तहसील डोलरिया में आयोजित भव्य श्री शिव महापुराण कथा के चतुर्थ दिवस में माता सती के जन्मोत्सव का प्रसंग सुनाया गया। डॉ. पुष्कर परसाई ने अपनी ओजस्वी वाणी से सती जन्म की महिमा का बखान करते हुए श्रद्धालुओं को भक्ति रस से सराबोर कर दिया। आचार्य जी ने प्रसंग की व्याख्या करते हुए बताया कि जगत जननी भगवती जगदंबा ने प्रजापति दक्ष की पुत्री के रूप में सती अवतार लिया। उन्होंने कहा कि भगवान शिव की शक्ति और शांति में ही समस्त संसार का पालन और कल्याण समाहित है। कथा के दौरान सती के देह त्याग और पुन: पार्वती के रूप में जन्म लेकर शिव से मिलन की कथा ने भक्तों को भावुक कर दिया।शिव की भक्ति निष्काम भक्ति होती हैं, जो कामनाएं लेकर जाता है। उस कामना को पूर्ण शिव अवश्य करते है। मन में छल कपट हो तो कोई कामना पूर्ण नहीं होती। उन्होंने कहा कि मन में बैर रखने से मन खराब हो जाता है, मन तो चंचल है, इसको जितना पवित्र रखोगे उतना ही ईश्वर आपके करीब रहेगा।इसलिए आपके मन पर काबू रख शिव भक्ति करें और उसका जो फल प्राप्त होगा, वह आपके सामने होगा। आचार्य श्री ने पार्वती जन्म और शिव की लीलाओं का सुन्दर चित्रण किया। शिव पार्वती मिलन की कथा कहते हुए कहा कि शिव को प्राप्त करने के लिए मां पार्वती का तप यह बताता है कि शिव को पाना और शिव मय हो जाने में क्या फर्क है। भगवान शिव कारण अवतार है करुणा करने वाले हैं शीघ्र प्रसन्न होने वाले हैं भगवान शिव का नाम दो अक्षर का है कल्याण करने वाला है शिव का नाम जो भी लेता है इस भवसागर से तर जाता है शिव की कृपा से है राम की प्राप्ति होती है न और राम की कृपा पास है कथा का समय 1:30 बजे से 4:30 बजे तक है आयोजकों ने सभी से कथा में पधारने का आग्रह किया।

