

नर्मदापुरम / श्री राम मंदिर ग्राम दतवासा तहसील डोलरिया में चल रही श्री शिव पुराण कथा के तृतीय दिवस में डॉ. पुष्कर परसाई ने कहा कि ज्ञानी की तुलना मेँ भक्त को भगवत प्राप्ति सरल है, क्यूंकि भगवान् साधन साध्य नहीं कृपा साध्य हैँ जो मनुष्य शिव भक्ति में स्वयं को अर्पित कर देता है। वह जन्म मरण के बंधनों से मुक्त हो जाता है। उन्होंने कहा कि जीवन नश्वर है। जीवन की सार्थकता तो शिव की भक्ति में ही निहित है। कलयुग में शिव महापुराण की कथा ही सबसे आसान मुक्ति का साधन है, जो शिव की कथा श्रवण करता है उसके सात जन्मों के पाप भी कट जाते हैं। उन्होंने महादेव की भक्ति और उन्हें प्रसन्न करने के उपाय भी बताएं। कथा के दौरान कहा कि भक्त की भक्ति से जल्द प्रसन्न होने वाले देवताओं में शिव ही है और शिव ही कल्याण करते हैं। शिव की भक्ति कर इस संसार रूपी भवसागर को पार कर अपने जीवन को सार्थक बनाएं।आचार्य श्री ने कहा कि इंसान को बनावटी जीवन नहीं जीना चाहिए, क्योंकि दिखावा और बनावटी भाषा रिश्तों को कमजोर करती है। जीवन में सच्चाई, सरलता और ईमानदारी आवश्यक है। झूठ, दिखावा और आडंबर से दूर रहकर ही श्रेष्ठ जीवन जिया जा सकता है। आचार्य श्री ने कहा कि 84 लाख योनियों में मनुष्य योनि सबसे श्रेष्ठ है, क्योंकि ईश्वर ने केवल मनुष्य को सोचने-समझने की शक्ति दी है। मनुष्य का जन्म ईश्वर भक्ति और सद्कर्म के लिए हुआ है। भगवान शिव को पाने के लिए गलत विचार, बुरी सोच, दूषित दृष्टि, गलत खान-पान और अनुचित पहनावे का त्याग करना आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिव महापुराण कहीं भी राम और कृष्ण की भक्ति को छोड़ने की बात नहीं कहती। कुछ लोग पंथ बनाकर भ्रम फैलाते हैं, जबकि भगवान शिव सबके पिता हैं। शिव अपने भक्तों की छोटी-छोटी भूलों को भी क्षमा कर देते हैं। शिव पूजन में यदि कोई कमी रह जाए तो माता पार्वती उसे पूर्ण कर देती हैं। आचार्य श्री ने कहा कि सजावट और दिखावा क्षणिक होते हैं, जबकि सच्ची का स्मरण करते हुए धर्म और भक्ति के मार्ग पर चलना चाहिए।

