

नर्मदापुर / राम मंदिर दतवासा तहसील डोलरिया में आयोजित शिव महापुराण के द्वितीय दिवस के अवसर पर भागवत भूषण आचार्य पुष्कर परसाई ने शिव भक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि कथा में मनोमंथन का साधन है यह मन की व्यथा मिटा देती है । इसके पश्चात आचार्य श्री ने उद्गार व्यक्त किए कि भगवान शिव की महिमा और प्रेम का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान का प्रेम प्राप्त करना भाग्यशाली की बात है। जो भगवान के बारे में जानने के लिए उत्सुक हैं, वे भी भाग्यवान हैं। आचार्य श्री ने बताया कि शिव पुराण का पाठ करने से कलयुग के प्रभाव से बचा जा सकता है। उन्होंने कहा कि हम जिस कलयुग में जी रहे हैं, इस युग में बड़े-बड़े महात्माओं ने गहरा चिंतन किया है। जो भक्ति को धारण करता है, वह कलयुग के प्रभाव से बच जाता है। मनुष्य को जीवन में तीन ताप परेशान करते हैं। भगवान के निकट पहुंचने से हमें इन तीनों तापों से छुटकारा मिलता है। उन्होंने कहा कि तब तक कलयुग के पाप परेशान करेंगे, जब तक शिव पुराण हमारे जीवन में शामिल न हो जाए। आचार्य जी ने भगवान शंकर की महिमा बताते हुए कहा कि वे मंगल राशि हैं। उनका नाम और ध्यान भी मंगलमय है। शिव जैसा समान दृष्टा कोई नहीं है। महादेव दैत्य एवं देवों के लिए सदा कृपावंत रहते हैं।

