

नर्मदापुरम / मां नर्मदा के किनारे शर्किट हाउस (परमहंस घाट) में चल रही पितरों की जीवात्मा की शांति हेतु, सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन आज कथा व्यास आचार्य पंडित राजेंद्र पुरोहित ने भगवान श्री कृष्ण की दिव्य बाल लीलाओं और गोवर्धन पूजा का अत्यंत मनोहारी वर्णन किया।
कथा के दौरान जैसे ही गोवर्धन पूजा और छप्पन भोग का प्रसंग आया, पूरा पंडाल ‘जय कन्हैया लाल की’ और ‘गिरिराज धरन की जय’ के जयकारों से गुंजायमान हो उठा।
श्रद्धालुओं ने नृत्य और भगवान के जयकारों के साथ गोवर्धन पर्वत की पूजन और परिक्रमा की और भव्यआरती में भाग लिया।
कथाव्यास आचार्य पंडित श्री ने पांचवें दिन की महिमा बताते हुए कहा कि भगवान कृष्ण की लीलाएं केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि मानव जीवन को सही दिशा देने का संदेश हैं। उन्होंने कथा के मुख्य प्रसंगों पर प्रकाश डाला:
• इंद्र का अहंकार भंग और प्रकृति पूजा: भगवान कृष्ण ने ब्रजवासियों को देवराज इंद्र की जगह गोवर्धन पर्वत और प्रकृति की पूजा करने की प्रेरणा दी, जो हमें पर्यावरण के संरक्षण का संदेश देती है।
• गोवर्धन धारण लीला: इंद्र के कोप और मूसलाधार बारिश से ब्रजवासियों की रक्षा के लिए भगवान ने अपनी कनिष्ठ उंगली पर विशाल गोवर्धन पर्वत को उठा लिया था।
• छप्पन भोग का महत्व: भगवान को सात दिनों तक भूख-प्यास भूलकर गोवर्धन उठाने के कारण ब्रजवासियों ने आठों पहर के हिसाब से छप्पन प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया था।
भक्तिमय माहौल और छप्पन भोग…..
कथा के दौरान भगवान कृष्ण और गोवर्धन जी की जीवंत झांकी सजाई गई। श्रद्धालुओं द्वारा भगवान को छप्पन भोग अर्पित किया गया। भजनों पर झूमते-नाचते भक्तों की भक्ति देखते ही बन रही थी।
आयोजन समिति……
देव ऋषि मनुष्य पितृ तर्पण के सदस्यों सहित सभी श्रद्धालुओं
ने छप्पन भोग का प्रसाद प्राप्त किया ।

