

नर्मदापुरम / द्रास / मध्यप्रदेश के हरदा जिले के टिमरनी निवासी तिनका सामाजिक संस्था के प्रशिक्षक रितेश तिवारी और मना मंडलेकर ने कश्मीर, द्रास तथा लेह-लद्दाख के दुर्गम एवं सीमावर्ती क्षेत्रों में लगभग 500 बालिकाओं को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण देकर उन्हें सशक्त बनाने का संदेश दिया। इस दौरान भारत-पाकिस्तान सीमा पर स्थित सीमावर्ती क्षेत्रों में पहुंचकर भी बालिकाओं को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण विशेष रूप से बालिकाओं के लिए आयोजित किया गया।
20 से 23 अगस्त 2026 तक शासकीय डिग्री कॉलेज द्रास के प्राचार्य नासिर शाबानी के नेतृत्व में प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान की लैंगिक समावेशी समानता पहल योजना के अंतर्गत विशेष आत्मरक्षा कार्यशाला आयोजित की गई। कॉलेज के अलावा उच्चतर माध्यमिक विद्यालय द्रास, उच्चतर माध्यमिक विद्यालय भिंबट, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, आर्मी गुडविल स्कूल द्रास और शासकीय हाई स्कूल कक्सार सहित विभिन्न संस्थानों में प्रशिक्षण दिया गया।
प्रशिक्षण में बालिकाओं को खतरे की पहचान, हमले से बचाव, सही समय पर प्रतिक्रिया और स्वयं की सुरक्षा की व्यावहारिक तकनीकों का अभ्यास कराया गया। बालिकाओं ने उत्साहपूर्वक प्रशिक्षण में भाग लिया। साथ ही नशीले पदार्थों के दुष्प्रभावों और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक करते हुए “स्वस्थ युवा, नशामुक्त समाज” का संदेश दिया गया।
कश्मीर में बॉर्डरलेस वर्ल्ड फाउंडेशन की शाखाओं का भी किया दौरा…
इसी दौरान रितेश तिवारी और मना मंडलेकर ने बॉर्डरलेस वर्ल्ड फाउंडेशन की तीन शाखाओं का दौरा किया एवं बालिकाओ को आत्मरक्षा के गुण सिखाये । उन्होंने नियंत्रण रेखा कुपवाड़ा, श्रीनगर और बीरवाह स्थित शाखाओं में संचालित सामाजिक कार्यों एवं गतिविधियों की जानकारी ली। बॉर्डरलेस वर्ल्ड फाउंडेशन के संस्थापक अधिक कदम हैं।
सेना के मेजर पीटर, कर्नल विकास दीक्षित एवं लेफ्टिनेंट कर्नल जगन्नाथ पोडियल ने रितेश तिवारी और मना मंडलेकर के आत्मरक्षा प्रशिक्षण एवं सामाजिक कार्यों की सराहना करते हुए उनका सम्मान किया। यह सम्मान टिमरनी और मध्यप्रदेश के लिए गौरव का विषय रहा।
प्राचार्य नासिर शाबानी ने बालिकाओं की सुरक्षा, आत्मविश्वास और सशक्तिकरण के लिए आत्मरक्षा प्रशिक्षण को महत्वपूर्ण बताते हुए दोनों प्रशिक्षकों के प्रयासों की सराहना की। टिमरनी से कश्मीर और भारत-पाकिस्तान सीमा तक पहुंचकर लगभग 500 बालिकाओं को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण देना बेटियों के सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

