
नर्मदापुरम / नगर पालिका और यातायात प्रशासन की लचर कार्यशैली का इससे बड़ा उदाहरण क्या होगा कि खुद मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) के सरकारी आवास के ठीक सामने मुख्य सड़क को अवैध ‘निजी पार्किंग’ बना दिया गया है। फल-फूल मार्केट की इस व्यस्त सड़क पर रोजाना बेखौफ तरीके से बीच रास्ते पर फोर-व्हीलर खड़ी की जा रही है। जिम्मेदारों की इस अनदेखी का खामियाजा प्रतिदिन तीन प्रमुख स्कूलों के मासूम बच्चों, नेहरू पार्क जाने वाले बुजुर्गों और हजारों राहगीरों को भुगतना पड़ रहा है। धार्मिक आयोजनों में भी बिगड़े हालात, कावड़ यात्रा के दौरान लगा था भीषण जाम
हाल ही में निकली कावड़ यात्रा के दौरान भी इस मनमानी पार्किंग के चलते पूरा मार्ग घंटों तक चक्काजाम की गिरफ्त में रहा। श्रद्धालुओं और आम जनता को भारी अव्यवस्था झेलनी पड़ी। स्थानीय लोगों का कहना है कि इसी लाइन का एक दुकानदार अपनी दुकान के ठीक सामने सड़क पर चार पहिया वाहन खड़ा कर देता है, जिससे व्यस्त सड़क एक संकरी गली में तब्दील हो जाती है।
रोजाना हजारों जिंदगियों की सुरक्षा से खिलवाड़….
विद्यार्थियों पर मंडराता खतरा- इसी संवेदनशील मार्ग पर शहर के प्रतिष्ठित SNG स्कूल, शासकीय गर्ल्स स्कूल और पंडित रामलाल शर्मा स्कूल स्थित हैं। छुट्टी और प्रवेश के समय सड़क पर वाहन अड़े रहने से बच्चों को तेज रफ्तार वाहनों के बीच से जान जोखिम में डालकर निकलना पड़ता है।
वरिष्ठ नागरिकों की राह में बाधा सुबह-शाम नेहरू पार्क टहलने जाने वाले बुजुर्गों के लिए पैदल चलने तक की जगह नहीं बचती, जिससे आए दिन हादसों का डर बना रहता है। व्यापारियों में भारी आक्रोश आसपास के अन्य दुकानदार इस दबंगई और मनमानी से त्रस्त हैं। सड़क घिरने से ग्राहकों का आना दूभर हो गया है और उनका व्यवसाय प्रभावित हो रहा है। शिकायतों के बाद भी अफसरों की चुप्पी, क्या बड़े हादसे का इंतजार जागरूक नागरिकों और व्यापारियों ने यातायात पुलिस, संबंधित थाना और नगर पालिका प्रशासन को कई बार मौखिक रूप से इस समस्या से अवगत कराया, लेकिन अब तक कोई चालानी या प्रतिबंधात्मक कार्रवाई नहीं हुई। अधिकारियों की यह रहस्यमयी खामोशी कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
नागरिकों का स्पष्ट कहना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते इस अतिक्रमण और अवैध पार्किंग पर बुलडोजर या क्रेन की कार्रवाई नहीं की, तो कभी भी गंभीर सड़क दुर्घटना या आपातकालीन एंबुलेंस फंसने जैसी अप्रिय स्थिति उत्पन्न हो सकती है। अब देखना यह है कि प्रशासन कुंभकर्णी नींद से जागता है या फिर जनता इसी तरह जाम के दलदल में पिसती रहेगी।

