
नर्मदापुरम /शारदीय नवरात्र के आठवें दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप यानी मां महागौरी की पूजा की जाती है। मां का वर्ण पूर्णतः गौर है। शास्त्रों में उनकी की उपमा शंख, चंद्र और कुंद के फूल से दी गई है। इतना ही नहीं मां के समस्त वस्त्र एवं आभूषण भी श्वेत हैं। इसलिए महागौरी कहलाती हैं।
मां महागौरी का स्वरूप उनकी चार भुजाएं हैं, इनका वाहन वृषभ है। मां का ऊपर का दाहिना हाथ अभय मुद्रा जबकि नीचे वाले दाहिने हाथ में त्रिशूल धारण की हुई हैं। बाएं हाथ में डमरू और नीचे का बांया हाथ वर मुद्रा है। नवरात्रि की अष्टमी के दिन देवी महागौरी को क्या भोग लगाएं?
नवरात्रि की अष्टमी पर मां महागौरी को नारियल और नारियल से बनी मिठाई का भोग लगाना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के आठवें दिन मां महागौरी को नारियल का भोग लगाने से सौभाग्य और सुख की प्राप्ति होती है।
नवरात्रि की अष्टमी के दिन माता को क्या चढ़ाना चाहिए?
नवरात्रि की अष्टमी के दिन महागौरी माता को नारियल, नारियल से बनी मिठाई, काले चने, फल, मिष्ठान, खीर-पूड़ी, हलवा, सफेद वस्त्र, रात की रानी का फूल, पान का बीड़ा चढ़ा सकते हैं. लेकिन पान का बीड़ा में सुपारी और चूना नहीं होना चाहिए।
महागौरी माता को कौन सा फूल पसंद है?
आठवां दिन मां महागौरी का है और मां का प्रिय फूल सफेद मोगरा, बेला और चमेली का फूल बहुत प्रिय है। मां महागौरी को सफेद फूल बहुत प्रिय हैं और इन्हें चढ़ाने से सभी मनोकामना पूरी होती है।
नवरात्रि की अष्टमी पर मां महागौरी की पूजा कैसे करें?
स्नान और वस्त्र धारण:- सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ सफेद कपड़े पहनें।
पूजा स्थल की शुद्धि:- पूजा स्थल को गंगाजल या शुद्ध जल से स्नान कराएं।
मां की स्थापना:- फिर मां महागौरी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
वस्त्र और पुष्प अर्पण:- मां को सफेद वस्त्र और सफेद फूल अर्पित करें।
श्रृंगार और तिलक:- मां को रोली, चंदन, कुमकुम और अक्षत चढ़ाएं।
भोग लगाएं:- मां महागौरी को नारियल और नारियल की मिठाई का भोग लगाएं।
मंत्र जाप और आरती:- महागौरी मां के मंत्रों का जाप करें और उनकी आरती गाएं।
कन्या पूजन:- अष्टमी पर नौ कन्याओं को देवी का रूप मानकर उनकी पूजा करें, भोजन कराएं और उपहार देकर विदा करें।
महागौरी माता की आरती
जय महागौरी जगत की माया….
जया उमा भवानी जय महामाया..
हरिद्वार कनखल के पासा.
महागौरी तेरा वहां निवासा..
चंद्रकली और ममता अंबे.
जय शक्ति जय जय मां जगदंबे..
भीमा देवी विमला माता.
कौशिकी देवी जग विख्याता..
हिमाचल के घर गौरी रूप तेरा.
महाकाली दुर्गा है स्वरूप तेरा..
सती सत’ हवन कुंड में था जलाया.
उसी धुएं ने रूप काली बनाया..
बना धर्म सिंह जो सवारी में आया.
तो शंकर ने त्रिशूल अपना दिखाया..
तभी मां ने महागौरी नाम पाया.
शरण आनेवाले का संकट मिटाया..
शनिवार को तेरी पूजा जो करता.
मां बिगड़ा हुआ काम उसका सुधरता..
भक्त बोलो तो सोच तुम क्या रहे हो.
महागौरी मां तेरी हरदम ही जय हो..। (संकलन – प्रीति चौहान)

