

नर्मदापुरम / हरियाली तीज से एक दिन पहले मनाया जाने वाला लोकपर्व सिंजारा 14 अगस्त को मनाया जाएगा।
सिंजारा राजस्थान का एक प्रमुख लोकपर्व है, जो विवाहित महिलाओं के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
अखंड सौभाग्य का व्रत तीज 15 अगस्त को है। पति की लंबी उम्र के लिए रखे जाने वाले इस व्रत को बड़े ही प्रेम और उल्लास के साथ राजस्थान, यूपी, एमपी में मनाया जाता है। कहीं-कहीं इस पर्व को सातुड़ी की तीज और कजली तीज भी कहते हैं। कहीं-कहीं तो तीज के नाम पर काफी उत्सव भी मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं पूरे 16 श्रृंगार करके शिव-पार्वती की पूजा करती हैं और अपने पति के लंबी उम्र की कामना करती हैं। सिंजारा जो तीज के एक दिन पहले आता है वो 14 अगस्त को है।
सिंजारा का अर्थ है श्रृंगार और उल्लास। इस दिन मायके की ओर से विवाहित बेटी या बहन के लिए शृंगार सामग्री, नए वस्त्र, मेहंदी, चूड़ियाँ, मिठाइयाँ (विशेषकर घेवर और फेणी), फल तथा उपहार भेजे जाते हैं। इसे ही “सिंजारा भेजना” कहा जाता है।
ये हैं इस दिन की प्रमुख परंपराएँ
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महिलाएँ मेहंदी रचाती हैं और सोलह श्रृंगार करती हैं।
झूले झूलती हैं तथा तीज के लोकगीत गाती हैं।
परिवार में घेवर, फेणी और अन्य पारंपरिक व्यंजन बनाए और बाँटे जाते हैं।
अगले दिन हरियाली तीज का व्रत और पार्वती तथा शिव की पूजा की जाती है। (संकलन – प्रीति चौहान)

