

नर्मदापुरम / न्याय की चौखट और कानून के रखवालों की नाक के नीचे जालसाजी, पहचान की चोरी और सामाजिक ताने-बाने को छिन्न-भिन्न करने का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस मामले ने सुरक्षा एजेंसियों से लेकर न्यायिक प्रशासन तक के होश उड़ा दिए हैं। शहर के पॉश इलाके संजय नगर से लेकर जिला न्यायालय परिसर तक सालों से ‘उपाध्याय’ उपनाम (सरनेम) का जो मुखौटा घूम रहा था, उसकी हकीकत जब बेनकाब हुई तो हर कोई सन्न रह गया। जांच में खुलासा हुआ है कि खुद को समाज में हिंदू और कोर्ट में कानून की रखवाली बताने वाली इस महिला का असली नाम रुबीना शेख है। आरोप है कि यह फर्जी महिला वकील न सिर्फ पहचान बदलकर लोगों को चूना लगा रही थी, बल्कि कोर्ट की गरिमा को तार-तार करते हुए वकालत का फर्जी धंधा भी चला रही थी। स्थानीय हिंदू संगठनों की मुस्तैदी और खुफिया इनपुट्स के बाद इस पूरे नेक्सस (नेटवर्क) का भंडाफोड़ हुआ है। उपाध्याय’ का फर्जीवाड़ा पहचान की चोरी और धर्मांतरण का संदिग्ध नेटवर्क खोजी कड़ियों को जोड़ने पर पता चला है कि रुबीना खान ने बेहद शातिर और सोची-समझी रणनीति के तहत अपनी असल धार्मिक पहचान को छुपाया। उसने संजय नगर जैसे संभ्रांत इलाके में मकान हासिल करने के लिए ‘उपाध्याय’ सरनेम का सहारा लिया और सालों तक इस झूठ को सच बनाकर रही।
हिंदू लड़कियों को बरगलाने और माइंड वाश करने का काम…
यह मामला सिर्फ एक फर्जी नाम से कमरा किराए पर लेने का नहीं है, इसके पीछे की कहानी बेहद गंभीर है। गंभीर आरोप रुबीना शेख पर पूर्व में कई हिंदू लड़कियों को बरगलाने, उनका माइंड वॉश करने और फिर उनका अवैध धर्मांतरण कराकर मुस्लिम समुदाय में शादियां कराने के गंभीर आरोप लग चुके हैं। संगठित गिरोह की आशंका हिंदू संगठनों को जब इस संदिग्ध गतिविधि की भनक लगी, तो उन्होंने अपने स्तर पर पड़ताल शुरू की। जांच में सामने आया कि महिला अकेले काम नहीं कर रही थी, बल्कि उसके पीछे एक बड़ा और संगठित सिंडिकेट है, जो समाज के सीधे-साधे लोगों को अपना शिकार बना रहा था।
सिस्टम को तमाचा: ‘आठवीं फेल’ महिला और कोर्ट में ‘अवैध’ वकालत……
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे डरावना और हैरान कर देने वाला पहलू यह है कि जो महिला महज आठवीं फेल है, जिसके पास शिक्षा के नाम पर बुनियादी डिग्रियां तक नहीं हैं, वह जिला न्यायालय परिसर जैसी अति-सुरक्षित और संवेदनशील जगह पर काली कोट पहनकर खुद को ‘अधिवक्ता’ (वकील) साबित कर रही थी। सूत्रों के मुताबिक, रुबीना खान ने कोर्ट में एंट्री लेने के लिए नगर के ही एक सीनियर वकील का दामन थामा था। वह उन सीनियर वकील की असिस्टेंट (जूनियर) बनकर कोर्ट परिसर में दाखिल हुई और धीरे-धीरे खुद को एक रसूखदार अधिकृत वकील के रूप में स्थापित कर लिया। यहां सीधे तौर पर दो बड़े तीखे सवाल खड़े होते हैं, बिना किसी कानूनी डिग्री, बार काउंसिल के रजिस्ट्रेशन या वेरिफिकेशन के, एक कम पढ़ी-लिखी महिला न्याय के सबसे बड़े केंद्र में सालों तक लोगों के साथ छल-कपट कैसे करती रही? क्या कोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था इतनी लचर है? उन सीनियर वकील की इस पूरे खेल में क्या भूमिका है, जिन्होंने इस फर्जी महिला को न सिर्फ अपनी जूनियर बनाकर कोर्ट में प्रवेश दिलाया बल्कि उसे कानूनी संरक्षण भी दिया? क्या उन्हें इस असलियत की जानकारी नहीं थी?
ब्लैकमेलिंग, अवैध उगाही और रसूखदारों का संरक्षण अब उच्च स्तरीय जांच की मांग हिंदू संगठनों और स्थानीय नागरिकों के तीखे आक्रोश के बाद अब यह मामला पूरी तरह तूल पकड़ चुका है। शुरुआती पड़ताल की परतें इशारा कर रही हैं कि रुबीना शेख भोली-भाली जनता को अपनी फर्जी वकालत और कथित रसूख के जाल में फंसाती थी। इसके बाद शुरू होता था मुकदमों का डर दिखाकर ब्लैकमेलिंग और मोटी रकम की अवैध उगाही का गंदा खेल। स्थानीय स्तर पर अब मांग उठ रही है कि जिला बार एसोसिएशन और पुलिस प्रशासन संयुक्त रूप से इस मामले की उच्च स्तरीय जांच सुनिश्चित करे।
इनका कहना है….
इस प्रकार के मामले जो सामने आ रहे हैं ऐसे लोगों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए और कौन-कौन उक्त महिला से जुड़ा है उसके नाम भी उजागर होना चाहिए।
आलोक शर्मा हिंदू संगठन,
नर्मदापुरम।
इनका कहना है…
इस मामले की थाने में शिकायत की है । उक्त महिला द्वारा कई लड़कियों के साथ धर्म परिवर्तन जैसी बात सामने आई है और इसके पीछे और लोग भी हैं। यदि पुलिस बारीकी से जांच पड़ताल करती है तो मामले में बड़ा खुलासा हो सकता है।
नितिन मेषकर,
बजरंग दल कार्यकर्ता एवं जिला संयोजक नर्मदापुरम।
इनका कहना है…..
इस मामले में पुलिस को शिकायत की गई है और जांच की मांग की है। दोषियों पर तत्काल कार्रवाई की जाए।
वंदना दुबे समाजसेवी,
नर्मदापुरम।

