
नर्मदापुरम / पौधरोपण के लिए यह अनुकूल समय है। विशेष रूप से नर्मदा तट के लिए। वर्तमान समय मानसून के आगमन का पूर्व चरण है। मुकेश श्रीवास्तव ने बताया कि पौधरोपण के लिए यह सबसे उत्तम समय माना जाता है, क्योंकि आने वाली वर्षा इन नए पौधों को स्थापित होने और जड़ें जमाने के लिए आवश्यक नमी प्रदान करती है। नर्मदा जी के ‘रिपेयरिंग जोन’ (तटीय क्षेत्र) में वृक्षारोपण न केवल मृदा अपरदनको रोकता है, बल्कि नर्मदा के जल को शुद्ध रखने और क्षेत्र के पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। श्रीवास्तव ने कहा कि पीपल का वैदिक महत्व होता है। स्कंद पुराण के अनुसार, पीपल के वृक्ष में साक्षात भगवान विष्णु का वास माना जाता है। इसे ‘अश्वत्थ’ कहा गया है। यह वृक्ष ऑक्सीजन का सबसे बड़ा स्रोत है और ध्यान व शांति के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। इसे ‘वट’ कहा जाता है, जिसमें त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) का वास माना गया है। यह अमरता और अक्षय का प्रतीक है। बरगद स्थिरता और लंबी आयु का प्रतिनिधित्व करता है, जो आध्यात्मिक साधना के लिए अनुकूल ऊर्जा प्रदान करता है। अर्जुन आयुर्वेद में इसे ‘हृद्य’ (हृदय के लिए लाभकारी) कहा गया है। आध्यात्मिक रूप से यह वृक्ष शक्ति और सुरक्षा का प्रतीक है। नर्मदा तट के लिए यह सबसे अनुकूल वृक्ष है, क्योंकि यह जल के किनारे बहुत तेजी से विकसित होता है। बाँस को सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इसे कई पूजा-अनुष्ठानों में शुभ माना गया है। यह लचीलेपन और निरंतर विकास का संदेश देता है। इन वृक्षों का रोपण करना न केवल पर्यावरण की सेवा है, बल्कि ‘तट संरक्षण’ की दिशा में एक बहुत बड़ा आध्यात्मिक कार्य है। यह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक अमूल्य धरोहर होगी।

