


नर्मदापुरम / 24 मई 1978 को मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम — Madhya Pradesh State Tourism Development Corporation (MPSTDC) — ने एक बड़े सपने के साथ अपनी यात्रा शुरू की थी। उद्देश्य था मध्यप्रदेश को देश और दुनिया के पर्यटन मानचित्र पर एक विशिष्ट पहचान दिलाना। पिछले 47 वर्षों में निगम ने पर्यटन विकास की ऐसी मजबूत नींव रखी, जिसने मध्यप्रदेश को “The Heart of Incredible India” के रूप में नई पहचान दिलाई।
सिर्फ दो होटलों से शुरू हुआ यह सफर आज भारत की सबसे बड़ी राज्य संचालित टूरिज्म और हॉस्पिटैलिटी चेन में शामिल हो चुका है। मध्यप्रदेश के पास खजुराहो, साँची, भीमबेटका, कान्हा, बांधवगढ़, ओरछा, उज्जैन, पचमढ़ी, मढ़ई और चुरना जैसे विश्वस्तरीय पर्यटन स्थल पहले से मौजूद थे, लेकिन पर्यटकों के लिए बुनियादी सुविधाएँ सीमित थीं।
ऐसे समय में MPSTDC ने उन दूरस्थ स्थलों पर होटल, रिसॉर्ट और पर्यटन सुविधाओं का विकास किया, जहाँ निजी निवेश लगभग नहीं के बराबर था। यही दूरदर्शी पहल आगे चलकर मध्यप्रदेश पर्यटन की सबसे बड़ी ताकत बनी। आज निगम का नेटवर्क प्रदेश के लगभग हर प्रमुख पर्यटन सर्किट तक फैला हुआ है और इसमें होटल, जंगल रिसॉर्ट, हेरिटेज प्रॉपर्टी, वे-साइड अमेनिटी तथा विभिन्न पर्यटन इकाइयाँ शामिल हैं।
पर्यटन के साथ रोजगार और स्थानीय विकास को भी मिली गति
MPSTDC बना मध्यप्रदेश की बदलती पहचान का प्रतीक
मध्यप्रदेश का पर्यटन मॉडल दो प्रमुख संस्थाओं पर आधारित है। Madhya Pradesh Tourism Board (MPTB) जहाँ पर्यटन प्रचार, ब्रांडिंग, निवेश और नई नीतियों पर कार्य करता है, वहीं MPSTDC पर्यटन सुविधाओं के निर्माण और संचालन की जिम्मेदारी निभाता है।
निगम का मुख्य फोकस हमेशा उन क्षेत्रों में पर्यटन अधोसंरचना विकसित करना रहा है, जहाँ निजी क्षेत्र की पहुँच नहीं थी। बाद में इन्हीं विकसित स्थलों को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के माध्यम से आगे बढ़ाया गया।
MPSTDC की उपलब्धियाँ केवल होटल निर्माण तक सीमित नहीं रहीं। निगम ने पर्यटन को स्थानीय विकास और रोजगार का सशक्त माध्यम बनाया। इससे हजारों युवाओं को रोजगार मिला, स्थानीय हस्तशिल्प एवं पारंपरिक व्यंजनों को नई पहचान मिली और दूरस्थ क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिला।
आज MPSTDC केवल एक पर्यटन निगम नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश की बदलती पहचान, करोड़ों पर्यटकों के विश्वास और हजारों परिवारों की आजीविका का मजबूत आधार बन चुका है। 24 मई का स्थापना दिवस उस दूरदृष्टि, समर्पण और निरंतर विकास का प्रतीक है, जिसने मध्यप्रदेश को देश के अग्रणी पर्यटन राज्यों में शामिल किया है।

