
नर्मदापुरम / जिले भर में हाल ही में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की गई थी। इस दौरान भ्रष्टाचार का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। सरकारी तंत्र की मिलीभगत से निजी वेयरहाउसों में धान के नाम पर रेत और अमानक सामग्री का भंडारण किया जा रहा है। अब इस पूरे मामले में कलेक्टर ने संज्ञान लिया है और विश्वस्त सूत्रों से जानकारी मिली है कि इस पूरे मामले की जांच भी कराई जाएगी। ऐसे और भी कई वेयरहाउस हैं जिनमें यह खेल हुआ है। इस पूरे कांड में लोगों सहित अधिकारी भी शामिल हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरे खेल में जिला प्रशासन और वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन के जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध नजर आ रही है।
रेत बोरियों में भरी गई……..
सांगाखेड़ा स्थित बालाजी वेयरहाउस में धान के साथ बड़े पैमाने पर रेत और कचरा (बसुआ) मिलाया गया है। बताया जा रहा है कि ट्रकों से रेत उतरवाकर उसे धान की बोरियों में भरा गया। लगभग दो हजार क्विंटल रेत को धान बताकर उसके फर्जी बिल तैयार किए गए हैं। जहां एक ओर सरकारी वेयरहाउसों में बोरियों की पैकिंग और वजन को लेकर समस्या आ रही है, वहीं बालाजी वेयरहाउस में हर बोरी का वजन जादुई रूप से 40 किलो (मानक) मिलना विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। भ्रष्टाचार की जड़ें सिर्फ मिलावट तक ही सीमित नहीं हैं। आरोप है कि जिला प्रबंधक ने जासलपुर और निमसाड़िया जैसी सहकारी समितियों के साथ मिलकर हजारों क्विंटल अमानक धान का संग्रहण कराया है।
निजी लोगों के पास छोड़ी वेयरहाउस की चाबियां……
नियमों के विरुद्ध वेयरहाउस की चाबियां निजी लोगों के पास छोड़ी गईं, जिससे अमानक धान और मिलावटी सामग्री को खपाने में आसानी हुई। स्थानीय लोगों और सूत्रों का दावा है कि यदि समय रहते उच्च स्तरीय जांच नहीं हुई, तो सरकारी खजाने को करोड़ों रुपए की चपत लगना तय है। वर्षों से काली सूची या अपात्र समितियों को अचानक केंद्र कैसे मि ल गया। हर बोरी का वजन कांटा-तौल में बिल्कुल एक समान 40 केजी होना कागजी हेरफेर की ओर इशारा करता है।

