
इटारसी / केसला / प्रशासन की नाक के नीचे एक गरीब आदिवासी शख्स पिछले 4 साल से अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। ग्राम पंचायत भट्टी के निवासी हरिराम गोंड, जो पिछले तीन दशकों से इसी माटी पर रह रहे हैं, उन्हें पंचायत ने कागजों में ‘लापता’ या ‘अपात्र’ कर उनकी समग्र आईडी डिलीट कर दी है। सरकारी सिस्टम की इस क्रूरता के कारण हरिराम आज दाने-दाने को मोहताज हैं, क्योंकि आईडी न होने से उन्हें शासन की किसी भी योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
*दस्तावेजों का अंबार, फिर भी सिस्टम लाचार*
हैरानी की बात यह है कि हरिराम के पास भारत का नागरिक होने के तमाम पुख्ता सबूत हैं। उनके पास पुराना राशन कार्ड, मतदाता परिचय पत्र और आधार कार्ड मौजूद है। इसके बावजूद, पिछले 4 वर्षों से पंचायत के चक्कर काटने के बाद भी उनकी आईडी दोबारा चालू नहीं की गई। यह मामला सीधे तौर पर सरपंच और सचिव की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान खड़े करता है।
*आदिवासी ब्लॉक में अपनों के साथ ही अन्याय*
ग्रामीणों के नेतृत्व में आज पीड़ित हरिराम को एसडीएम और तहसीलदार के समक्ष पेश किया गया। सामाजिक कार्यकर्ता अखिलेश पांडे ने तीखे शब्दों में कहा: “केसला एक आदिवासी विकासखंड है, जहाँ सरकार आदिवासियों के उत्थान के लिए करोड़ों खर्च करती है। लेकिन यहाँ के सरपंच-सचिव की लापरवाही ने एक गरीब आदिवासी को उसके बुनियादी हक से वंचित कर दिया है। यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि प्रशासनिक अपराध है।”
वहीं, ग्रामीण अंकित वर्मा ने स्पष्ट किया कि कई बार मौखिक और लिखित शिकायतों के बावजूद स्थानीय प्रशासन कुंभकर्णी नींद सोया हुआ है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही हरिराम की आईडी बहाल नहीं हुई, तो ग्रामीण उग्र आंदोलन के लिए विवश होंगे और मामले को उच्च स्तर तक ले जाएंगे।
*दोषियों पर कार्रवाई की मांग*
शिकायत सौंपने के दौरान गोलू भाईजान समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। ग्रामीणों की मांग है कि:…
हरिराम गोंड की समग्र आईडी तत्काल प्रभाव से सक्रिय की जाए।
4 साल तक उन्हें लाभ से वंचित रखने वाले सरपंच और सचिव पर दंडात्मक कार्रवाई हो।
पंचायत के अन्य कार्यों की भी निष्पक्ष जांच की जाए।
अगली कार्रवाई:…
एसडीएम कार्यालय ने शिकायत को संज्ञान में लिया है और संबंधित अधिकारियों को मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। अब देखना यह है कि सरकारी फाइलों में उलझा हरिराम का हक उसे कब तक मिल पाता है।

