

नर्मदापुरम / मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा अच्छी शिक्षा का संकल्प और शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप की प्रेरणा के अनुसार प्रभारी अपर संचालक डा. मनीष वर्मा के मार्गदर्शन में एक माह पूर्व अंग्रेजी विषय नवाचार हेतु कक्षा तीन से आठ तक के शासकीय अंग्रेजी शिक्षकों के लिए अंग्रेजी कार्यशाला आयोजित की गई। सबसे पहले पाइलट प्रोजेक्ट के रूप में नर्मदापुरम ब्लाक लिया गया। कार्यशाला का मुख्य लक्ष्य था कि अंग्रेजी को भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुसार समझ और गतिविधि के आधार पर बच्चों की समझ के अनुसार पढ़ाया जाये। शिक्षकों को अनिवार्य क्रियान्वयन योजना भी दी गई। लगभग सभी शिक्षको ने बहुत अच्छी तरह क्रियान्वयन भी किया। वर्ड यूज मेथड इतनी सरल थी कि रिजल्ट फास्ट आ रहे थे। इससे अंग्रेजी शिक्षको ने भी स्वयं बड़ी रूचि से पढ़ाया। पढ़ाने के निरंतर पर्फोर्मेंस वीडियो भी भेजते रहे। शिक्षकों ने खुश होकर बताया कि इससे तो कमजोर बच्चे भी जल्दी सीख रहे है और अभिभावक भी प्रभावित हैं। किर्यांवयन में विशेष अच्छा करने वाले शिक्षकों को उच्च अधिकारियों द्वारा हस्ताक्षर युक्त बेस्ट परफॉर्मेंस इंग्लिश टीचर का बहुत उपयोगी सर्टिफिकेट भी दिया जायेगा।
*कार्यशाला में शिक्षक प्रशिक्षण*
नवाचार शिक्षा संस्थान नई दिल्ली के संस्थापक संजय जैन इनोवेटिव इंग्लिश रिसर्चर और उनकी टीम द्वारा दिया। विशेष उत्साही परिणामों से प्रभावित होकर निरीक्षण हेतु उच्च शिक्षा संस्थान भोपाल से चार सदस्य की टीम आमंत्रित की गई। टीम ने दो दिन रहकर 15 स्कूल का इंस्पेक्शन किया । कुछ स्कूल में बिना पूर्व जानकारी दिए सरप्राइज इंस्पेक्शन भी किया गया। फास्ट परिणामों से प्रभावित होकर टीम ने इसे अंग्रेजी विषय की शिक्षा परीक्षा परिणामों में सुधार के लिए ऐतिहासिक और क्रांतिकारी कार्य कहा। डा. वर्मा ने बताया कि इस प्रकार की नवाचार कार्यशाला सिर्फ अंग्रेजी ही नहीं अपितु हिंदी और गणित में भी की जाना है। आगामी सत्र से प्रदेश स्तर पर अंग्रेजी गणित और हिंदी के लिए कार्यशालाओं को पूर्ण व्यवस्थित और विशेष योजनाओं के साथ आयोजित किया जायेगा। इससे राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के लक्ष्य की प्राप्ति हो सकेगी और परिणाम भी फास्ट आयेंगे। क्रियान्वयन को पूरी तरह सफल बनाने के लिए डां वर्मा पूरे समय बड़े और छोटे सभी अधिकारियों के संपर्क में रहकर अपडेट लेते रहे। श्री वर्मा ने आगे कहा कि आकर्षक बिल्डिंग के साथ-साथ आकर्षक परिणाम भी होने पर बहुत अमीर घरों के बच्चे भी सरकारी स्कूल की ओर आकर्षित होंगे। इस प्रकार की फास्ट परिणामों वाली अच्छी शिक्षा मिलने पर महंगी बिल्डिंग और सुविधाओं की सार्थकता बढ़ जायेगी। कार्यशाला में वर्ड यूज मेथड्स सिखाए गये ताकि बच्चों को सेन्टन्स न रटना पड़े। वर्ड्स को समझ आधारित तरीके से प्रेक्टिस करना सिखाया जाता है। समझकर प्रैक्टिस करने से वर्ड्स अपने आप याद हो जाते हैं। एक बार सीखे गये वर्ड्स हर साल सभी कक्षाओं मे काम आते रहे, क्योंकि लगभग 95 प्रतिशत वर्ड्स कायन होते हैं। उन्हें पहले की तरह प्रत्येक साल बार बार रटना नहीं पडे। इस मेथड में अंग्रेजी शब्दों को समझ और गतिविधि के अनुसार प्रेक्टिस करने के तरीके बताए जाते हैं। एक ही वर्ड् से कई प्रकार के इग्जाम्पल और सेन्टन्सेस बनाना सिखाया जाता है। इससे बच्चे बहुत ही कम समय में और रोचक तरीके से स्वयं सेन्टन्स बनाना सीख जाते हैं। इस कारण परीक्षा में क्वेश्चन आन्सर आदि रटकर नहीं लिखना पड़ेंगे। स्वयं के मन से बनाकर लिख सकते हैं। इस नवाचार में लिखने के साथ साथ स्पोकन इंग्लिश पर भी विशेष फोकस किया गया ।

