
सिवनी मालवा / चंद्रमाजी की तपस्या स्थली चांदगढ़ कुटी नर्मदा पुराण में रेवा खण्ड के द्वितीय भाग के दसवे अध्याय में इस विषय पर विस्तार से प्रकाश डाला गया है। पौराणिक युग में जहां चन्द्रमा जी ने तपस्या कर अपने श्राप से मुक्ति प्राप्त की थी उसे चन्द्रमा की तपोस्थली जूनीकुटी के नाम से पहचानते हैं । जो मनुष्य चांदगढ़ की जूनीकुटी पर आकर पुण्योतया सलिला माँ नर्मदा जी के घाट पर स्नान, ध्यान, पूजन, अर्चना, दान और यज्ञ हवन करता है। ऐसे मनुष्य के सभी प्रकार के रोग, शोक, दोषों का नाश होता है और मनुष्य अपने सांसरिक श्रेष्ठ को प्राप्त करता है। संत ब्रज बिहारी दास ने श्री नर्मदा मंदिर चाँदगढ़ कुटी में 5 नवम्बर से प्रारंभ श्री रामचरित्र मानस के 111 पाठ चल रहे है, जिसका विराम 22 फरवरी को है। सभी क्षेत्रवासियों ने श्री रामचरित्र मानस पाठ में पधारे आज नर्मदा जयंती पर चन्द्रमा की तपोस्थली चांदगढ़ कुटी के दर्शन किए। जिनमें प्रवीण अवस्थी, श्रीमती दिपाली अवस्थी, माँ नर्मदा के भक्त पंडित पवन शर्मा, दिव्यांश शर्मा, आदर्श शर्मा, ध्रुव शर्मा, ब्रज किशोर गुर्जर शामिल हैं।

