काफिला छोड़ बस में सवार हुए मुख्यमंत्री , पेश की सादगी की मिसाल
दयाराम फौजदार रिपोर्टर नर्मदापुरम।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सिंगरौली प्रवास के दौरान राजसी ठाट-बाठ और भारी-भरकम वीआईपी प्रोटोकॉल को किनारे रखकर जनसेवा और सादगी का एक बड़ा संदेश दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जनप्रतिनिधियों से की गई कम खर्चीलेपन और अनुशासन की अपील को अमलीजामा पहनाते हुए, मुख्यमंत्री ने सिंगरौली पहुंचते ही अपना पूरा कारकेड त्याग दिया। सीएम डॉ. यादव वीआईपी गाड़ियों के बजाय क्षेत्र के तमाम मंत्रियों, सांसदों और विधायकों के साथ एक सामान्य टूरिस्ट बस में सवार होकर कार्यक्रम स्थल पहुंचे। मुख्यमंत्री का यह ‘जनता जनार्दन’ वाला अंदाज सोशल मीडिया से लेकर सिंगरौली की सड़कों तक चर्चा का विषय बना हुआ है। एक ही बस में सवार थी पूरी ‘सरकार’ मुख्यमंत्री के इस सादगी भरे सफर में उनके साथ मध्य प्रदेश सरकार के कई कद्दावर नेता और स्थानीय जनप्रतिनिधि भी सह-यात्री बनकर निकले। बस के सफर में मुख्य रूप से शामिल थे इनमें संपतिया उइके, राधा सिंह , डॉ. राजेश मिश्रा क्षेत्रीय सांसद स्थानीय विधायक रामनिवास शाह (सिंगरौली), राजेंद्र मेश्राम (देवसर), कुंवर सिंह टेकाम (धौहनी), और विश्वामित्र पाठक (सिंहावल)। संगठन व निगम पदाधिकारी में ओम जैन (अध्यक्ष, गृह एवं अधोसंरचना निर्माण मंडल), वीरेंद्र गोयल (अध्यक्ष, सिंगरौली विकास प्राधिकरण), और देवेश पाण्डेय (नगर निगम अध्यक्ष)। पद से बड़ा जनता का प्रेम मुख्यमंत्री का संदेश जनप्रतिनिधियों की असली पहचान उनके बड़े-बड़े काफिलों या सख्त प्रोटोकॉल से नहीं, बल्कि जनता के प्रति उनकी सेवा भावना और सीधे जुड़ाव से होती है।” मुख्यमंत्री के इस कदम ने यह साफ कर दिया है कि शासन का उद्देश्य जनता पर रौब जमाना नहीं, बल्कि उनके बीच रहकर उनकी सेवा करना है। कार्यक्रम स्थल पर मौजूद आम नागरिकों ने मुख्यमंत्री के इस सहज और सुलभ रूप का दिल खोलकर स्वागत किया। जानकारों का मानना है कि सीएम का यह कदम अन्य नेताओं को भी फिजूलखर्ची रोकने और सादगी से काम करने की प्रेरणा देगा।

